अबकी दीवाली तेरे संग
अबकी दीवाली तेरे संग
मैं नित्य रोज तुझे बुलाऊँगी
अश्रुओं की ढेर लगाऊँगी
आ गई है दीवाली अब,
तेरे संग ही दीप जलाऊँगी।।
तू ही मेरा प्रकाश हो
तू ही मेरा आस हो
सूना है घर का आंगन
तू ही मेरा विश्वास हो।।
तू मेरा गगन का उज्ज्वल
तू मेरा नेत्र का कज्जल
तुझसे मैं क्यूँ दूर रहूँ,
तू ही मेरे जीवन का पल।।
तुझसे ही मेरा शाम ढले
तुझसे ही मेरी साँस चले
दीवाली का त्यौहार प्रिय
हर रग में तू ही खिले।।
मैं रह न सकती तेरे बिन
मैं बावरी हूँ अब हर दिन
कैसे मैं अब दीया जलाऊँ
कैसे मैं त्यौहार मनाऊँ।।
