STORYMIRROR

लता तेजेश्वर रेणुका

Abstract

4  

लता तेजेश्वर रेणुका

Abstract

आज़ाद भारत

आज़ाद भारत

1 min
339

हम भी थे उस स्वतंत्रता में शामिल

स्वतंत्र सेनानियों के बीच कहीं

खड़े होकर ताक रहे थे

जब झंडा फहराया गया था 


आजादी का, फूल गिरे थे आसमान से 

और जमीं भी गीली थी

स्वतंत्र सेनानियों के खून से,

लिखे थे जो आजादी के चंद लफ़्ज़


पगडंडी में बिखेर पड़े थे 

उन फूलों की तरह

जिन्हें मसल दिए थे अंग्रेजियों ने 

इज्जत, स्वतंत्र देश के नागरिकता की


खून बहे थे नल नालियों में

और पैदा हुए थे शत शत देशप्रेमी

हर एक बूँद की लहू से

सैकड़ों देशभक्त पैदा हुए


हर एक के माथे पर लिखा था 

हम हैं नागरिक देश के

जान मान लूटा देंगे और यूँ हुआ भी था 

हमारा भारत स्वतंत्र।


हर एक कण मिट्टी के लिए 

एक जान शहीद हुआ था, 

कोई आसान नहीं था

इस लड़ाई स्वतंत्रता का और


हम शामिल भी थे एक फूल की तरह

उस गीली जमीन पर जहां से

भारत की सेनाएँ गुजरे थे बंधूक ताने, 

सीने पर गोलियाँ खाते शहीद हो गिर पड़े थे 


तब मेरा तन रक्त से लाल हो गया था

लाल गुलाब की तरह

पर चुभने न दिया मैने काँटे गुलाब के,

ढक दिए थे अपने पंखुड़ियों से


जय जयकार करते हुए

अपने सेनाओं की और देश की

वही मेरी पुष्पांजली थी,

मुझे गर्व है कि मैं भी शामिल थी

एक फूल बनकर भारत की आज़ादी में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract