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लता तेजेश्वर रेणुका

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लता तेजेश्वर रेणुका

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फूल और मधु

फूल और मधु

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ये वादियाँ ये दरख्तें तुम पर निसार है

तेरी सौंदर्य के आगे सभी अभिसार है।1।


हवा में है सुगंध और पत्तों की हरियाली 

सुबह को चढ़ाया ज्यों फूलों का हार है।2।


तितलियाँ, चिरैयों की झुरमुटें गुनगुनाये 

फूलों पर जैसे आशिकाना अंदाज़ है।

आभास दे रहे यहाँ मधु बेसुमार है।3।


सुंगध से उसकी खींच आई है दूर से

मधुमखी न रोक पाई अपना साज है।4।


तितली, झुठलाई देख मधुमक्खी को 

नहीं यहाँ कोई फूलों का भरमार है।5।


मौसम है आर्द्र और 'रेणुका' में नमी

देख प्रकृति भी बन गयी अभिसार है।6।


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