श्याम मोहन नामदेव
Classics
जब जग की विषम वेदनाओं,
ने दिल मेरा छलनी कर डाला।
तब हृदयांचालकी भावभूमि पर,
प्रकटी काव्यमयी हाला।।
जिसको कागज पर उतारता,
मैं साहित्यक मतवाला।
ये ही है साकेत मेरा और,
ये ही मेरी मधुशाला।।
श्रद्धांजलि
मुहब्बत निभान...
मातु वन्दना
आत्मकथ्य
नारी व्यथा
प्यार हो गया
प्रेम
फागुन
रंग बदलती होल...
प्रियतम के सं...
भ्रम मिट जाता सब उसका और तत्वज्ञान की प्राप्ति हो उसको। भ्रम मिट जाता सब उसका और तत्वज्ञान की प्राप्ति हो उसको।
तुम्हारा जीवंत प्रेम रेल की पटरियों से दौड़ता हुआ बादलों के गुच्छों से लिपट जाता है तुम्हारा जीवंत प्रेम रेल की पटरियों से दौड़ता हुआ बादलों के गुच्छों से ...
मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे।
ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बंद हो गई नाग और चन्... ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बं...
श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें। श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें।
वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में। वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में।
तीव्र वेग से वह्नि आती क्या तुम तनकर रहते हो? तो भूतेश से अश्वत्थामा क्यों ठनकर यूँ तीव्र वेग से वह्नि आती क्या तुम तनकर रहते हो? तो भूतेश से अश्वत्थामा क्यों ठ...
देख चन्द्रमुखी सीता को, बन गये नयन चकोर राम के देख चन्द्रमुखी सीता को, बन गये नयन चकोर राम के
पर कभी तो एसा होगा एक दिन मैं नहीं लौटूंगा। पर कभी तो एसा होगा एक दिन मैं नहीं लौटूंगा।
भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ। भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ।
कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल । कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल ।
तुम्हे राम छुड़ाने आयेगें। सीते तुम विश्र्वास रखो ... तुम्हे राम छुड़ाने आयेगें। सीते तुम विश्र्वास रखो ...
वह पुरुष सो रहा था उस गुफा में कई दिनों से। वह पुरुष सो रहा था उस गुफा में कई दिनों से।
तुमसे मिलने को शायद मैं बेमतलब ही लालायित थी। तुमसे मिलने को शायद मैं बेमतलब ही लालायित थी।
विष्णु जी के सातवे अवतार थे श्रीराम अत्यधिक गुणवान, प्रतिभाशाली, सरल स्वभाव। विष्णु जी के सातवे अवतार थे श्रीराम अत्यधिक गुणवान, प्रतिभाशाली, सरल स्वभाव...
गुरू द्रोण तो जैसे इसी क्षण का इंतज़ार कर रहे थे तुरन्त उनके मुख से उनके दिल की बात आई। गुरू द्रोण तो जैसे इसी क्षण का इंतज़ार कर रहे थे तुरन्त उनके मुख से उनके दिल की ब...
किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित। किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित।
एकाकी मैं रह गई, कैसा यह व्रजपात। मन मेरा अब रिक्त है, मन में झंझावात।। एकाकी मैं रह गई, कैसा यह व्रजपात। मन मेरा अब रिक्त है, मन में झंझावात।।
उद्धार प्रभु नारी अहिल्या तव चरण-रज से हुई । उद्धार प्रभु नारी अहिल्या तव चरण-रज से हुई ।