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Siddhi Diwakar Bajpai

Abstract

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Siddhi Diwakar Bajpai

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आत्म प्रेमी

आत्म प्रेमी

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चाँदनी रात है जब अच्छी, तो तुझे सवेरा क्यों बनाऊँ

ये मेरा दिल है सिर्फ मेरा, इसे तेरा बसेरा क्यों बनाऊँ

आशिक़ों का क्या है, वो तो धोखे से दिल छीनते हैं

जब बेईमान है तू पहले से, तो अब तुझे लुटेरा क्यों बनाऊँ।



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