आषाढ़ मास आया
आषाढ़ मास आया
आषाढ़ का प्रथम दिवस
आकाश हुआ मेघाछन्न,
मन्द सुरभित मारुत चला
वर्षा की बून्दें पड़ने लगीं।
आज का दिन कितना मधुमय
भोर में पक्षियों का कलनाद ,
गुप्तनवरात्रि भी आज से शुरू
और शैलपुत्री का प्रथम दिन।
पेड़ पत्ते नहाकर हरे हो गये
नवजीवन पा ताजे हो गये,
हवा में झूम रही वल्लरियॉं
तरुओं की फैली हैं डालियॉं।
मॉं काली, तारा, त्रिपुरसुन्दरी,
भुवनेश्वरी,छिन्नमस्ता,त्रिपुरभैरवी,
धूमावती,बगलामुखी,मातंगी ,
मॉं कमला की होती अर्चना।
गुप्त नवरात्र की ये महाविद्या
अब प्रावृट्काल प्रारम्भ हुआ,
कृषकों ने खेतों में हल चलाये
जुताई बुवाई की शुरुआत की।
