आसमां का सफर
आसमां का सफर
आसमां के सफ़र में
होता है क्या ?
हल्के फुल्के आते जाते
रूई से फाहों सी बादलों के
नन्हे मुन्ने श्वेत भूरे झुंड
और आसमान के झूठे
नीले आसमानी रंग के सिवा,
आसमान में उड़ने वाला
देखता है कुछ नहीं
पाता है कुछ नहीं
कोई आधार नहीं होता है
टिकने के लिए
इसलिए चला आता है
ज़मीं पर देर सबेर
ज़मीं से लाख ठनने के बाद भी,
फिर आसमान में
उड़ने का गुमान कैसा ?
आसमान में सफ़र पर
स्वाभिमान किस बात का ?
आसमान पर भरोसा नहीं है
किसी मुश्किल में साथ देने का
ताकत नहीं हैं रूई के फाहों सी
बादलों के सतह पर
गिरते हुए रुक जाने का,
आसमान नहीं है ठिकाना
किसी का भी
प्रारंभ से लेकर अंत तक का,
आसमान के पास कुछ भी नहीं है
देने के लिए जीव को
अपने अंतहीन विशाल क्षेत्र के रहते हुए भी,
इसलिए आसमां में सफर
होता हैं शून्य में सफ़र
जो हो सकता है शायद सत्य
अर्द्ध सत्य या मिथ्या
इंसान के अभिमान गुमान या ख़्वाब सा।।
