आरज़ू दिल कि साँवरा 'नीलम'
आरज़ू दिल कि साँवरा 'नीलम'
वज़्न - 2122 1212 22/112
अर्कान - फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन/फ़इलुन
बह्र - बहर-ए-ख़फ़ीफ़ मख़बून महज़ूफ मक़तूअ
काफ़िया: "ई" की बंदिश)
रदीफ़ - दिल की
2122 1212 22/112
#मतला
इश्क़ में बात बन गई दिल की।
कह गई वो अनकही दिल की।
#हुस्ने_मत्तला
क़ाफ़िया तंग शायरी दिल की,
नज़्म में कुछ भले कमी दिल की।
#शेर
जो दिया है तुने वो रहमत है,
धड़कने भी ये दी हुई दिल की।
#शेर
खेल मेरे नसीब का है सब,
रह गई बात भी दबी दिल की।
#शेर
रहमते-इश्क़ जो मिली मुझको,
ये मुहब्बत भी आखरी दिल की।
#शेर
एक दिन खोलकर जी रो लेंगे,
दूर होगी ये बेकली दिल की।
#मक़्ता
आरज़ू दिल कि साँवरा 'नीलम'
गोपियों जैसी बंदगी दिल की।
नीलम शर्मा ✍️
