STORYMIRROR

Shivam Antapuriya

Tragedy Others

3  

Shivam Antapuriya

Tragedy Others

"आपदाओं का सैलाब"

"आपदाओं का सैलाब"

1 min
179

किसानों की कथित पीड़ा सुनाने 

आज आया हूँ 

बने जो जख्म से नासूर दिखाने उनको आया हूँ 


बड़ा बेदर्द है शासन, सुनना कुछ भी नहीं चाहता 

केवल अपनी ही बातें सुनाना उसको है आता

 

कहीं भाषण, कहीं नारे, कहीं पर रैलियाँ देखीं 

सूखी कृषकों के घर की नहीं हैं रोटियाँ देखीं 


किसानों की यही पीड़ा मेरे आँसू बहाती हैं 

बहुत देखा है आँखों ने, नहीं अब देख पातीं हैं 


कभी ओले, कभी बारिश, कभी तूफ़ान आता है 

बेमौसमी आपदाओं का यही सैलाब आता है 


किसानों का मुखर चेहरा बड़ा मायूस रहता है 

नेताओं का दिया, भाषण जब भाषण ही रहता है 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy