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Shivam Antapuriya

Romance

4  

Shivam Antapuriya

Romance

प्रेम नहीं पहचानेंगे

प्रेम नहीं पहचानेंगे

1 min
289



नाम मोहब्बत का सुनते ही 

मेरा दिल घबराता है 

याद तुम्हारी आती है 

ये बदन भीग सा जाता है 

सारी रात जागते हैं कोई 

उपचार नहीं मिल पाता है 


तट तटस्थ होकर थक जाते 

ये अश्रु नहीं रूक पाते हैं 

महज़ समाजी ठेकेदारों के कारण 

ये प्रेम विलय न हो पाते हैं 


बहुत लहू धाराएँ बहतीं 

बहुत बदन मिट्टी हो जाता हैं 

ये ढाई शब्द का बोझ जरा 

क्यों लोग नहीं सह पाते हैं 


द्वंद्व उठा आरोप लगा 

वो मन ही मन मुस्काते हैं 

जरा प्रेम की बात को लेकर 

वो अम्बार बनाते जाते हैं 


सच्चाई की दहलीजों को 

लोग तरसते जाते हैं 

प्रेम एक ये सच्चाई है 

जिससे लोग मुकरते जाते हैं 


प्रेम जरा भी करना हो तो 

सावधान होकर करना 

प्रेम ग्रंथ के पन्नों में 

इतिहास जरा होगा पढ़ना 


ये घोर कलयुगी धारा में 

राधा-माधव,मीरा न पहचानेंगे 

जरा सन्देह बेबुनियादी साक्ष्यों से 

तुमको आरोपी बतला देंगे 


प्रेम बिछड़ जो जाता है 

तो मौत नहीं हल होता है 

जरा सब्र रखकर देखो 

सब पहले जैसा हो जाता है 


जरा-जरा सी बातों को क्यों 

दिल पर तुम ले जाते हो 

प्रेम पुजारिन राधा को क्यों 

भूल यहाँ पर जाते हो! 



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