आओ खेलें होली
आओ खेलें होली
भूलकर सारे गिले-शिकवे मिल जाओ आज सब गले
आया होली का त्योहार चलो मिलकर सब प्रेम रंग भरें
लगाओ सबके गालो में प्रेम और स्नेह का तुम गुलाल ,
खेलो यारों मिलकर होली ना रहे आज कोई मलाल,
भर -भर लेकर आओ पिचकारी सब खेलो यहाँ मस्ती में,
रंगों से होकर सराबोर सब दिख रहें हैं इस बस्ती में ,
आज कर लो तुम मिलकर शोर, हुडदंग और ठिठोली ,
गोरे गालों को कर दो गुलाबी बच ना पाए प्रियतमा भोली ,
दिख रहे चहुँ ओर ढोल ,मंजिरा और रंग-बिरंगे कपड़े हैं ,
किसी के हाथ में गुलाल लगे और कुछ पिचकारी पकड़े हैं ,
ऐसा लगता जैसे सुन्दर इंद्रधनुष धरती पर उतर आया है,
हर घर में खुशबू आती माँ ने मीठा पकवान बनाया है ,
एक दूजे को रंग में रंगकर सबने गीत मल्हार गाया है ,
खुशियों की सौगात लिए आज होली का त्यौहार आया है ,
जब रंग में रंग मिल जाते हैं दिल सबके खिल जाते हैं ,
जो रूठे थे हमसे उनके चेहरों पर भी मुस्कान लाया है ,
एक दूजे संग सब झूम रहे हो कर मस्ती में सराबोर ,
जाति धर्म का कहीं भेद नहीं बिखरी खुशियाँ चहुँ ओर है ,
रंगों का त्योहार होली हम सभी को बहुत ही भाता है,
कई बार देखा है यह रंग बिछड़ों को भी करीब लाता है ,
साथी के हाथ पैर सब रंग दो आज चेहरे पर बनी रंगोली है ,
रंग लगा कर गालो में कह दो तुम बुरा न मानो होली है।
