STORYMIRROR

Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Inspirational

4  

Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Inspirational

छुपा सच

छुपा सच

1 min
294

सच्चाई छुप नहीं सकती झूठ के उसूलों से, 

खुशबू आती नहीं कागजी नकली फूलों से। 


सत्य हो सकता है किंचित ओट से बाधित, 

जैसे सूर्य छिपता बादली गोद में मुकलित। 


वैसे ही सत्य होता नहीं कभी कहीं विचलित, 

कितना भी करें सच को झूठ श्रापित कंपित। 


झूठ की बदली के छिन्न-भिन्न होते ही उदित, 

चारों दिशाएं सत्य के खुमार से होतीं लोहित। 


छुपे सत्य की गर्जना सिंहनी हुंकार सी राजित, 

झूठ लांछित धुंध कुहासी आवरण हो वाष्पित



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract