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Kusum Lata

Tragedy

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Kusum Lata

Tragedy

आंसू

आंसू

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मेरे आंसू बहुत हठी हो गए हैं 
बहुत ही जिद्दी हो गए हैं 
 या यूं कहूं कि वे 
Zen G हो गए हैं 
खुशी में आंखे जो कभी 
 यूं ही छलक जाया करती थीं 
अब वे खुशी जाहिर करने से डरती हैं 
गम में भी आंसू नहीं बहते हैं 
आंखों से निकलना ही नहीं चाहते हैं 
ग्लेशियर बन कर पत्थर हो गए हैं 
 पिघलने की आस में बर्फ सख्त है 
आंखों से बहकर जो कभी 
अपने दिल की बात कह देते थे 
 अब दिल में बातों का अंबार है 
 शब्द के बर्फीले तूफान में 
भावना डूब सी गई है 
मेरे आंसू बहुत जिद्दी हो गए हैं 
वे आंखों से निकलते ही नहीं हैं।


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