STORYMIRROR

Kusum Lata

Inspirational

4  

Kusum Lata

Inspirational

मैं

मैं

1 min
15

मैं बहुत कुछ करना चाहती हूँ 
बहुत कुछ कर सकती हूँ 
खूब तानें सुनती हूँ 
भरी महफ़िल में बेइज्जत होती हूँ 
रोज हतोत्साहित होती हूँ 
मेरे अंदर की आग नहीं बुझती
मेरी आंखों में भी सपने हैं 
मैं गिरती हूँ , पर हार नहीं मानती 
मैं लड़ती हूँ और अपने रास्ते बनाती हूँ 
तभी एक आवाज आती है 
उठ और कर्म कर 
कर्म कर अपने तानों का जवाब दे
सम्मान प्राप्त कर 
महफ़िल की शान बन
मैं उठती हूँ, आगे बढ़ती हूँ 
मेरी आवाज़ बनती हूँ 
मेरी पहचान बनती हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational