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Kusum Lata

Inspirational

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Kusum Lata

Inspirational

मैं

मैं

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मैं बहुत कुछ करना चाहती हूँ 
बहुत कुछ कर सकती हूँ 
खूब तानें सुनती हूँ 
भरी महफ़िल में बेइज्जत होती हूँ 
रोज हतोत्साहित होती हूँ 
मेरे अंदर की आग नहीं बुझती
मेरी आंखों में भी सपने हैं 
मैं गिरती हूँ , पर हार नहीं मानती 
मैं लड़ती हूँ और अपने रास्ते बनाती हूँ 
तभी एक आवाज आती है 
उठ और कर्म कर 
कर्म कर अपने तानों का जवाब दे
सम्मान प्राप्त कर 
महफ़िल की शान बन
मैं उठती हूँ, आगे बढ़ती हूँ 
मेरी आवाज़ बनती हूँ 
मेरी पहचान बनती हूँ।


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