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Kusum Lata

Tragedy

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Kusum Lata

Tragedy

कैसे लिखूंँ

कैसे लिखूंँ

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मैंने सोचा कि मैं भी कविता लिखूंँ

पर कैसे, मेरे पास शब्द ही नहीं हैं

शब्दों का अभाव है 

किसी भी विषय को कैसे स्पष्ट करूं

सोचती हूंँ संस्कारों के विषय में लिखूँ 

संस्कार आजकल कहाँ रह गए हैं 

घर घर में आधुनिकता का वास है 

बच्चे बड़ों की बात नहीं सुनते 

कहते हैं अब आपका जमाना नहीं रहा

उलट पुलट कपड़े उनकी आधुनिकता की पहचान है 

फिर सोचा शिक्षा के बारें में लिखूंँ

पर शिक्षा क्या सिखा रही है 

बड़ी बड़ी डिग्रियां लेकर स्वयं को शिक्षित कहलाते हैं 

छोटों को प्यार बड़ो को इज्जत देना उन्हें आता नहीं 

स्वयं को पैसा कमाने की मशीन बना

अपना ऐशोआराम ही भाता है

सोचती हूँ कविता लिखूंँ पर लिख नहीं पाती

क्योंकि मेरे पास शब्द ही नहीं हैं। 


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