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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy

भाई दूज

भाई दूज

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परिवार छोटे हो गये 

रिश्ते खोटे हो गये 

सब अपने में मस्त हैं 

इसीलिए अवसाद ग्रस्त हैं 

मां बाप वृद्धाश्रम में रह रहे 

न जाने कितने कष्ट सह रहे 

भाई बहन के बीच भाभी खड़ी है

वह भी अपनी जिद पे अड़ी है 

सब औपचारिकता भर है 

नहीं कुछ बाकी कसर है 

एक रस्म है ,निभाये जा रहे हैं 

इसी तरह बस, भाई दूज मना रहे हैं 

बच्चा भी बस एक एक 

खुश होते उसे देख देख 

भाई है पर बहन नहीं 

या बहन है पर भाई नहीं 

कैसे मनायें भाई दूज 

प्रश्न बड़ा है अब तो बूझ ? 

कम से कम दो तो हों बच्चे 

भाई बहन में तभी होंगे बंधन सच्चे 

दिलों में प्रेम नहीं तो कैसी भाई दूज 

क्या "गिफ्ट" ही सब कुछ है 

एक बार अपने दिल से तो पूछ ? 


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