आखों की तन्हाई
आखों की तन्हाई
झील सी गहरी आंखों से,तन्हाई जब झलकती है
कोई अश्क का कतरा गिरता है तो अहसास होता है
कि जैसे कोई रंज, दिल में उतरा जा रहा है
कि जैसे कुछ बिखरा जा रहा है ।।
झील सी गहरी आंखों से तनहाई जब झलकती है
ये गीत हैं कोई या कोई ग़ज़ल हैं ,
ये आंखें हैं या खुदा की शक्ल हैं ,
कि सजदे में इनके सर झुका जा रहा है ।
छाई है खुमारी इनके दीदार की,
कि छांव में इनकी जीवन सँवरा जा रहा है ।
झील सी गहरी आंखों से .....इन
झील सी गहरी आंखों से तन्हाई जब झलकती है ।

