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आखिर तुम मुझसे चाहती क्या हो

आखिर तुम मुझसे चाहती क्या हो

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आखिर तुम मुझसे चाहती क्या हो

आज सोचने की ये मैंने कोशिश की है।


हम जब भी मिलते हैं

बहुत कम समय के लिए।


हाँ, समय कम होता है मेरे लिए

मैं तो चाहता हूँ।


हम हमेशा के लिए साथ हो जाये

और किसी के देख लेने का डर भी न हो।


मैंने पाया है तुमको एक साथी की तरह

जो मुझको हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।


हमेशा मेरे साथ न होते हुए भी

मेरे साथ होती है।


बिना दिखाए तुम चाहती हो

कि मैं खुश हो जाऊँ।


मैंने पाया है तुमको

उस प्रेमिका की तरह।


जो अपने आँसुओं को छुपा कर

मेरे चेहरे पर हँसी लाना चाहती है।


जो चाहती है सिर्फ मुझको सुनना

खुद खामोश रह के।


और चाहती है मेरी कल्पनाओं से भरी दुनिया को

मेरे साथ ही पूरा करना।


मुझको ये डर रहता है कि

तुमको मैं परेशान तो नहीं कर देता।


कुछ ज़बरदस्ती तो नहीं करता

तुम्हारे साथ।


मगर जब तुम्हारी हँसी खिलखिलाती है

दिल को अजीब सा सुकून मिलता है।


मेरे लिए राहत की बात ये है

तुम मेरे लिए वक़्त निकाल लेती हो।


इस बात को मुझको जताती भी नहीं

तुम्हे भी मेरा साथ पसंद है वक़्त बिताना भी।


मगर शायद डरती हो कि

मैं कुछ और न समझ लूँ इस बात को।


तुमसे प्यार करने के बारे में

मैंने सोचा नहीं था।


तुमको धीरे-धीरे जानते हुए

ये अपने आप हुआ है।


ऐसा नहीं है कि

मुझे इस बात की खुशी नहीं।


खुशी है और बहुत ज़्यादा है

चाहता हूँ कि जो हम दोनों चाहते हैं

वो बात पूरी हो जाये।


साथ हमारा यूँ ही बना रहे

हमेशा-हमेशा के लिए।।


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