आज़ादी की शाम
आज़ादी की शाम
आज़ादी की शाम निराली
देश भर में धूम मचा ली
चारों ओर तिरंगा लहरा
सब तरफ लगा है पहरा
मातृभूमि की आज़ादी का
महोत्सव हम मना रहे हैं
अजर,अमर रहे देश हमारा
अटूट उम्मीद जगा रहे हैं
दुल्हन बनी है भारत माता
पुष्प - सुगन्ध महकी है
हाथ में लेकर ध्वज तिरंगा
खुशी से जनता चहकी है
सन् सैंतालीस में १५ अगस्त को
पहली दफा ये शाम थी आई
लाखों शहीद- क्रांतिकारियों की
संग अपने ये याद थी लाई
इसी तरह हर साल हम
मनाएं जश्न, इस शाम को
कितनी मूल्यवान शाम है ये
बताएं हम सारे जहान को
सदा रहे सलामत हमारे
भारत की आज़ादी
देश रहे मज़बूत सदा और
बना रहे फ़ौलादी।
