STORYMIRROR

अनिल कुमार निश्छल

Romance

2  

अनिल कुमार निश्छल

Romance

आज फिर

आज फिर

1 min
124

आज फिर थोड़ी पिला दो ना

गोद में लेकर फिर सुला दो ना


मानते हैं कदम बहकते हैं फिर

थोड़ा ठहरने की तुम दवा दो ना


ख़्वाब मचलते हैं बाद पीने के

तूफ़ान थमने की तुम दुआ दो ना


आईने से नज़र मिला सकें हम

ऐसी खूबसूरत हमें अदा दो ना


मय से नशीली आँखें तेरी हैं

आज साक़ी में मिला दो ना


पहली मुलाक़ात ताज़ा होगी

हया से नज़रें झुका दो ना


आओ खुशबू लिए शहर मेरे

घर-आँगन मेरा महका दो ना


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance