आईना था लॉकडाउन
आईना था लॉकडाउन
कितना कुछ कोरोना और लॉकडाउन दिखा गया,
घर में रहना औ बातें खुद से भी करना सिखा गया।
इंसानी ताकत को आईना कुदरत का दिखा गया,
गैर जरूरी हसरतों को हद में रहना सिखा गया।
दिखा गया हकीक़त इस फानी दुनिया की सारी,
लिख गया फिर नए सिरे से यह तकदीर हमारी।
कुदरत से हर पल करना छेड़छाड़ पड़ता है भारी,
कुछ ही वक्त में ही निकाल गया ये अकड़ हमारी।
फुस्स कर दी इसने तरक्की की तालीम हमारी,
धरी रह गई दुनिया की तहज़ीबों की हर तैयारी।
याद रखो के दुनिया में कुदरत की भी हिस्सेदारी,
संभाल के कुदरत को रखना है अपनी जिम्मेदारी।
बंद हुए दरवाज़े हों मंदिर मस्जिद चर्च या गुरुद्वारे,
खिदमत पे जुटे रहे जो वो ही मज़हब असली सारे।
मज़हब का असली मतलब यह हमको बता गया,
रहता नहीं वक्त एक सा यह भी हमको जता गया।
सोचो तो आईना था लॉकडाउन असलियत दिखा गया,
बाकी सीखना बहुत कुछ, बातें नई नवेली सिखा गया।
