Prashant Beybaar
Abstract Fantasy Others
आदमी की बिसात यहाँ फ़क़त इक अख़बार सी है।
आज ख़बर, कल रद्दी और शक्ल इश्तहार सी है।
लोग बैठे हैं ...
हौसला
फूल दिल तक़दी...
प्यास हूँ सहर...
कार के शीशे म...
ऐसे भी ग़म होत...
कोई तदबीर हो ...
जागी पलकों पे...
मीलों की दूरी...
आँखों में जो ...
पहले खुद से मुलाकात करले अभी के लिए अलविदा तुझे। पहले खुद से मुलाकात करले अभी के लिए अलविदा तुझे।
समझ समझ कर अब कितना समझूं। समझदार भी समझ कर लुट गया भाई। समझ समझ कर अब कितना समझूं। समझदार भी समझ कर लुट गया भाई।
वो मासुमियत वो सच्चाई मुझ में हमेशा रहने देना। वो मासुमियत वो सच्चाई मुझ में हमेशा रहने देना।
पर मैंने कह दिया मैं पंछी हूँ , उड़ना चाहती हूँ मैं हि मर्यादा हूँ और मुझे लाल रंग पसंद पर मैंने कह दिया मैं पंछी हूँ , उड़ना चाहती हूँ मैं हि मर्यादा हूँ और मुझे लाल...
बस अकेले ही लड़ रही थी वजूद खुद का ही मिटा रही थी. बस अकेले ही लड़ रही थी वजूद खुद का ही मिटा रही थी.
जाता हूँ अब वर्षों में मेरे गाँव, मेरा गाँव जो इतना बदल गया।। जाता हूँ अब वर्षों में मेरे गाँव, मेरा गाँव जो इतना बदल गया।।
आज गोपाष्टमी है, आज हम गौमाता की पूजा, सेवा करते हैं. आज गोपाष्टमी है, आज हम गौमाता की पूजा, सेवा करते हैं.
फिर ना जाने ये दुनिया क्यों, बेटा और बेटी में इतना फर्क है करती। फिर ना जाने ये दुनिया क्यों, बेटा और बेटी में इतना फर्क है करती।
सबकी मंगल चाहने वाली वह महिला कथित धर्म के ठेकेदारों द्वारा स्वयं ही अमंगल कहलाती है , सबकी मंगल चाहने वाली वह महिला कथित धर्म के ठेकेदारों द्वारा स्वयं ही अमंगल कहलात...
शब्दों का भी अपना एक संसार होता है। शब्दों का भी अपना एक संसार होता है।
तब सारे तारे बाराती बनकर जमकर डांस करते हैं । तब सारे तारे बाराती बनकर जमकर डांस करते हैं ।
कौन दिशा कौन डगर मैं चली जा रही। कौन दिशा कौन डगर मैं चली जा रही।
सही मायनों में यह जाड़े के मौसम सुविधासंपन्न लोगों के लिए ही है। सही मायनों में यह जाड़े के मौसम सुविधासंपन्न लोगों के लिए ही है।
मुझको नहीं उलझना है बस तेरी ममता के आगे सुधीर शीश झुकाता है। मुझको नहीं उलझना है बस तेरी ममता के आगे सुधीर शीश झुकाता है।
यही है आनंद, जीवन के कुछ पल, यही जीवन के कुछ पल... यही है आनंद, जीवन के कुछ पल, यही जीवन के कुछ पल...
दर्द ही दर्द है जिस में ऐसी है हर पल की ये ज़िंदगी... मेरे जी भर के रोने से भी नहीं= दर्द ही दर्द है जिस में ऐसी है हर पल की ये ज़िंदगी... मेरे जी भर के रोने से भी...
आपको अपना प्यारा सा रामसा पीर रूणिचा में लीनी समाधि, रामसा पीर आपको अपना प्यारा सा रामसा पीर रूणिचा में लीनी समाधि, रामसा पीर
शादी की सालगिरह की एक बार फिर मुबारकबाद दे गई। शादी की सालगिरह की एक बार फिर मुबारकबाद दे गई।
वह प्रेमी जो था प्रारम्भ से ही तुम्हारा तुम्हारे अंदर का 'स्व'। वह प्रेमी जो था प्रारम्भ से ही तुम्हारा तुम्हारे अंदर का 'स्व'।
और स्वर्ग में मेरा नाम भी निश्चित ही आपके साथ साथ अमर हो जायेगा। और स्वर्ग में मेरा नाम भी निश्चित ही आपके साथ साथ अमर हो जायेगा।