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Prashant Beybaar

Abstract Fantasy Others

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Prashant Beybaar

Abstract Fantasy Others

आदमी की बिसात यहाँ फ़क़त इक अख़बार सी है।

आदमी की बिसात यहाँ फ़क़त इक अख़बार सी है।

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आदमी की बिसात यहाँ फ़क़त इक अख़बार सी है।

आज ख़बर, कल रद्दी और शक्ल इश्तहार सी है।



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