Prashant Beybaar
Abstract Fantasy Others
आदमी की बिसात यहाँ फ़क़त इक अख़बार सी है।
आज ख़बर, कल रद्दी और शक्ल इश्तहार सी है।
लोग बैठे हैं ...
हौसला
फूल दिल तक़दी...
प्यास हूँ सहर...
कार के शीशे म...
ऐसे भी ग़म होत...
कोई तदबीर हो ...
जागी पलकों पे...
मीलों की दूरी...
आँखों में जो ...
मेहंदी का रंग जितना देर तक बरकरार रहता है, नये जोड़ों के लिए यह उतना ही शुभ माना जाता है मेहंदी का रंग जितना देर तक बरकरार रहता है, नये जोड़ों के लिए यह उतना ही शुभ माना...
उस सपने को जीने का, उस काम को करने का, जो आपके दिल में बसता था। उस सपने को जीने का, उस काम को करने का, जो आपके दिल में बसता था।
पिता का समझदारी वरदान है , हो जाता पुत्र का तब अनमोल हो जाता है रिश्ता पिता पुत्र का। पिता का समझदारी वरदान है , हो जाता पुत्र का तब अनमोल हो जाता है रिश्ता पिता प...
फलों का तो राजा कहलाता है,आम गर्मी का कर देता है,यह काम तमाम। फलों का तो राजा कहलाता है,आम गर्मी का कर देता है,यह काम तमाम।
बात करने का तरीका होता है अलग अलग घर में कुछ और, बाहर में कुछ और बात करने का तरीका होता है अलग अलग घर में कुछ और, बाहर में कुछ और
पहचान, न खुद को यार तू, पहचान न खुद को यार तू... जानता हूँ, कि आंखें तेरी भी रोती है। पहचान, न खुद को यार तू, पहचान न खुद को यार तू... जानता हूँ, कि आंखें तेरी भी ...
राम की शरण में आने के चोर रास्ते तलाशने लगे हैं, राम की शरण में आने के चोर रास्ते तलाशने लगे हैं,
ऐ ज़िंदगी तू क्या है, आ कुछ लफ़्ज़ों में बयां कर लू; ऐ ज़िंदगी तू क्या है, आ कुछ लफ़्ज़ों में बयां कर लू;
जिंदगी से जिंदगी के जंग लिख रहा हूं कभी खुशियां तो कभी गम लिख रहा हूं। जिंदगी से जिंदगी के जंग लिख रहा हूं कभी खुशियां तो कभी गम लिख रहा हूं।
दुखों से निकलने की भरपूर प्रयास लगाया इस जीवन में बहुत कुछ खोया और पाया। दुखों से निकलने की भरपूर प्रयास लगाया इस जीवन में बहुत कुछ खोया और पाया।
ये आंसू मेरे नहीं जो मेरी आंखों से बह रहे है ये आंसू भी तुम्हारे है ,तुम्हें देखकर निकल रहे है ये आंसू मेरे नहीं जो मेरी आंखों से बह रहे है ये आंसू भी तुम्हारे है ,तुम्हें ...
मानिए न मानिए हम स्वार्थवश ही कर रहे हैं मानिए न मानिए हम स्वार्थवश ही कर रहे हैं
चाँद पर जा सकती है, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती है, चाँद पर जा सकती है, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती है,
प्रभु! सचमुच आप कुछ देना चाहते हैं तो एक दिन के लिए अपने सारे अधिकार दे दीजिए। प्रभु! सचमुच आप कुछ देना चाहते हैं तो एक दिन के लिए अपने सारे अधिकार दे दीजिए...
बाहर से घर आकर मन लगेगा क्या बेटी कैसे करूँ तुम्हारी बिदाई बेटी। बाहर से घर आकर मन लगेगा क्या बेटी कैसे करूँ तुम्हारी बिदाई बेटी।
सुबह सुबह कोयल की पंछियों की चहचहाना जीने की चाह और सुबह की लाली में खो जाना सुबह सुबह कोयल की पंछियों की चहचहाना जीने की चाह और सुबह की लाली में खो जाना
होली है भाई होली है दोस्तो की बड़ी टोली है। होली है भाई होली है दोस्तो की बड़ी टोली है।
हम आप ही उनका बचपन छीन रहे हैं हम आप ही उनका बचपन छीन रहे हैं
उनके अंत:करण के परिवर्तन की दिशा का रुख तक कनक प्रभा जी ने मोड़ दिया। उनके अंत:करण के परिवर्तन की दिशा का रुख तक कनक प्रभा जी ने मोड़ दिया।
मन की तसल्ली के लिए बस हिंदी दिवस का केवल झुनझुना बजा रहे। मन की तसल्ली के लिए बस हिंदी दिवस का केवल झुनझुना बजा रहे।