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झुमकी ....(भाग एक)
झुमकी ....(भाग एक)
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© Anshu sharma

Drama

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यह कहानी के राजस्थान एक छोटे से गाँव से शुरू होती है।

झुमकी और उसकी माँ इस छोटे से गाँव में रहती थी। झुमकी बहुत सुंदर थी। झुमकी की सुंदरता देखते ही बनती थी जैसे संगमरमर से तराशा गया हो। उसकी माँ दिन र-त घरों में काम करके अपना गुजर-बसर करती थी। झुमकी को अकेले ही पाल पोस कर बड़ा किया था। झुमकी के पिता बचपन में ही गुजर गए थे, झुमकी की माँ जैसे-जैसे वृद्ध हो रही थी वैसे ही उसे झुमकी की शादी की चिंता खाए जा रही थी, बस किसी तरह झुमकी का रिश्ता एक अच्छे घर में हो जाए।

झुमकी की माँ के पास गाँव से एक रिश्ता आया। अगले दिन झुमकी को दिखाने का तय हुआ, सुबह ही माँ ने आवाज लगाई ..ओ झुमकी उठ, जा नहा धो ले, मेहमानों के आने का वक्त होने वाला है। झुमकी की डर से आँख खुल गयी, वह भागती हुयी माँ के गले लग गयी, नहीं माँ, हम नहीं जायेंगे, तुझे अकेले छोड़ के,

हट पगली आँखों में आँसू भरे हुये माँ ने झुमकी को कसकर पकड़ लिया।

बेटी सब को अपने घर जाना होता है। मेरे पिता के जाने के बाद सारी जिम्मेदारी निभाकर में भी भगवान के पास जाना चाहती हूँ। तेरे बिना कोई नहीं है मेरा। अब तू बड़ी हो गई है। आजकल का जमाना में घर में बेटी रखना बहुत मुश्किल हो गया है, चील कौवों की नजरें हैं, जितनी जल्दी विदा हो जाये अच्छा है। अब रुलाती रहेगी क्या ! जा तैयार हो जा। झुमकी आँखों में आँसू भरे-

माँ तू मेरे बिना कैसे रहेगी ? तुझे आदत ही नहीं है, सारा घर का काम अकेले ही करना होगा, मेरा भी वहाँ मन नहीं लगेगा। पता नहीं लोग कैसे होंगे ?

अच्छा अच्छा, अब बाकी बाद में, नहा धो के कुछ खा ले मेहमान आते होंगे। झुमकी की माँ थोड़ा डाँटती हुई उसे बोली।

झुमकी नहाने चली गई और अपना पीले रंग का घाघरा चोली लाल किनारी वाला पहन ली, गजब की सुंंदरता झलक रही थी। माँ ने कुछ दिन पहले ही आज के दिन के लिये सिल दिया था। थोड़ी देर बाद दो-तीन बुजुर्ग उनके साथ एक महिला और 24-25 साल का एक लड़का सब को बैठाकर झुमकी की माँँ ने झुमकी को चाय बनाने बैठा दिया था। झुमकी चाय लेकर अंदर आई। झुमकी की माँ ने झुमकी को बैठने को कहा-

यह हमारी लड़की है। बड़ी गरीबी में हमने पाला है। बहुत सीधी साधी है। घर का काम जानती है। सब की सेवा करेगी। सबकी नजर ऊपर से नीचे तक उसे आँखो से नाप रही थी। झुमकी की सुन्दरता में कोई कमी नहीं निकाल सकता था। लडके की माँ ने-

नाचना गाना आता है, खाना बनाना, झुमकी ने धीरे से सिर हिला दिया, क्या नाम है ?

झुमकी..

झुमकी ने धीरे से नजर झुका के कहा। कुछ देर मे झुमकी की माँ ने उसे अंदर जाने को कहा। झुमकी अंदर चली गई। लड़के के पिता ने माता को देखा और माँ ने तुरंत हाँमी भर दी।

झुमकी हमें पसंद है। यह हमारा लड़का है सूरज, पास में ही गाँव माखिनपूर है और हम झुमकी का खूब अच्छे से ध्यान रखेंगे।

झुमकी की माँ ने अपनी गरीबी हालत बता कर देने को उसके पास कुछ नहीं था। दो चाँदी के कड़े, झांझर वाली पायल और एक हार था जो कि उसकी शादी का रखा था।

लड़के वाले मान गए और गरीबी हालत देखकर वह हम कुछ ही लोग आएंगे और शादी करके चले जाएंगे।

कुछ दिन बाद झुमकी शादी कर के ससुराल चली गयी। तीन चार महीने बाद, सूरज ये कह कर शहर चला गया कि नौकरी के लिये जा रहे हैं, कुछ दिन मे झुमकी को भी वहीं बुला लेगा।

झुमकी को दुःख हुआ पर वो जानती थी कि मजबूरी है। घर के काम मे लगी रहती कभी अपनी माँ के बारे में सोच सोच कर रो लेती, कैसै मेरी माँ सब घर का काम अकेले कर रही होगी। गाय को चराने अकेले जाती होगी, खाना ठीक से भी नहीं खाती होगी..मन तो था कि उड़ कर माँ के पास पहुँच जाऊँ। गले लगकर खूब रोऊँ, बताऊँ की तेरे और सूरज के बिना यहाँ कितनी अकेली है।

सूरज ने जाकर कोई पत्र नही लिखा था, सवेरे ही उठ कर नहा कर, कुँए से पानी ला कर वो काम मे लग जाती सुबह से रात का पता नहीं चलता। उसे लग रहा था कि सास-ससुर की सेवा करने ही उसे लाया गया हो। सास से पूछती तो एक ही जवाब होता-

आ जावेगा, दूर जो गया है। पत्र लिखने का वक्त ही कहाँ होगा। परदेस है, काम से आके थक के सो जाता होगा।

एक दिन रात को पानी पीने उठी। घड़ा सास के कमरे के बाहर रखा था, गरमी के मारे गला सूख गया था। कमरे से जो आवाज सुनी, ठीक से सुनायी नहीं दी, बस इतना सुन पाई, शहर से कोई मेहमान आने वाला था पर कौन ? ये सुनकर झुमकी पानी ले के सोने चली गयी।

कौन था ये मेहमान ? सूरज का कोई अता पता क्यूँ नहीं था ? ये सब पढ़िये अगले भाग में....

गरीबी प्यास परदेश

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