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Anita Sharma

Romance Tragedy Inspirational

3  

Anita Sharma

Romance Tragedy Inspirational

पति पत्नी और वो

पति पत्नी और वो

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निशा कहाँ हो देखो अनुराधा आ गई। रुद्र ने अपनी बीबी को आवाज देते हुये कहा।

आ रही हूँ...... आ रही हूँ...... बोलते हुये निशा किचन से निकल कर बाहर आ गई।

रुद्र ने दोनों का परिचय करवाते हुये कहा...." निशा ये अनु है। अनु ये निशा है। "

दोनों ने एक दूसरे को हाथ जोड़कर नमस्ते किया। पर पता नहीं  क्यों निशा को रुद्र का अनुराधा को अनु बोलना अच्छा नहीं लगा था । फिर भी उसने अनुराधा को बिठाते हुये पूछा.. "क्या लोगी आप??"


तो अनुराधा के बोलने से पहले ही रुद्र बोला "अनु को तो दालचिनी वाली कॉफी पसन्द है। है न... देखा अनु मुझे अभी भी सब याद है। रुद्र ने बच्चों की तरह खुश होते हुये कहा। "

उसकी इस बात से जहाँ अनुराधा मुस्करा दी वहीं निशा ने रुद्र को घूर कर देखा। और अनुराधा से बोली ठीक है मैं दालचीनी वाली कॉफी लेकर आती हूँ। आप लोग बातें कीजिये।

निशा कॉफी बनाते हुये सोचने लगी क्या रुद्र आज भी अनुराधा से प्यार करते है ? फिर खुद ही जवाब सोच लिया "करते ही है।" अपना पहला प्यार कोई भूलता है क्या? तभी तो आज भी उसकी पसन्द याद है।

पर रुद्र पर मुझे पूरा विश्वास है। उन्होंने तो मुझे पहली रात में ही बता दिया था। कि वो अनुराधा से प्यार करते थे। पर कुछ पारिवारिक वजह से दोनों की शादी नहीं हो पाई । और रुद्र की शादी मुझसे और अनुराधा की शादी कहीं और हो गई।


फिर कुछ महीनों बाद ही पता चला कि अनुराधा का उसके पति से तलाक हो गया। वजह क्या थी पता नहीं पर उसका असर निशा ने रुद्र पर देखा था। कितना दुखी हो गये थे। उस समय निशा ने रुद्र को पत्नी नहीं एक प्रेयसी बन कर संभाला था।

धीरे - धीरे अनुराधा की बातें कम हो गई। उसकी जगह घर की जिम्मेवारी और बच्चों की बातों ने ले ली।

निशा को लगा रुद्र उन्हें भूल गये। पर आज ये वहम दूर हो गया। पता नहीं ये यहाँ क्यु आईं है? अगर इस शहर में कोई काम था ? तो वही रहती जहाँ आई है। सोचते हुये निशा कॉफी ले आई।

कॉफी पीते हुए अनुराधा एकदम शान्त थी और रुद्र बोले जा रहे थे। तभी निशा ने एक सवाल पूछ लिया....... आपका तलाक क्यों हो गया था अनुराधा जी ??

इस सवाल से भले ही निशा ने अनुराधा पर अपना गुस्सा निकाला था। पर तुरन्त उसे अपने गलत सवाल का एहसास भी हो गया । उसने बात को संभालते हुये कहा "मेरा मतलब है तुम अकेले कैसे रहती हो?"


अनुराधा ने मुस्कराते हुये कहा ****"कोई बात नहीं, अब इन सवालों से मुझे फर्क नहीं पड़ता। पर आपको जरूर बताना चाहती हूँ, मेरी शादी टूटने की वजह मेरा शादी से पहले आपके पति के साथ प्रेम संबंध है।

हमारे समाज में लड़कों के प्रेम संबंध से कोई परेशानी नहीं होती। सभी उसे माफ कर देते है। जैसे आपने अपने पति को कर दिया। पर एक लड़की को इसकी सजा हमेशा मिलती रहती है। उसी सजा के रूप में मुझे मेरे पति ने तलाक दे दिया। "

उसके इस जवाब से जैसे रुद्र का चेहरा उतर गया। उसके चेहरे के हाव- भाव देखकर निशा को लगा अगर वो यहाँ न होती तो शायद दोनों एक दूसरे के दुख को दूर करने को अपना कंधा दे देते।


एक स्त्री होने के नाते निशा को अनुराधा से थोड़ी हमदर्दी होने लगी थी। तो उसने मन में एक  फैसला लिया और रुद्र से बोली "ये जी आप बोलते थे की अनुराधा जी को अपने घर के पास वाला पार्क बहुत पसन्द है। तो ये इतने दिनों बाद आई है, तो इन्हें वहाँ घुमा लाइये। पुरानी चीजे देख कर अच्छा लगेगा। "

ये सुन रुद्र तो तुरंत तैयार हो गये पर अनुराधा को थोड़ी झिझक लग रही थी। उसकी वजह शायद निशा ही थी।

तो निशा ने खुद से बोल दिया.... अरे मैं भी चलती साथ में पर अभी बच्चे कोचिंग से वापिस आ रहे होंगे। तो घर में कोई तो होना चाहिये। "

निशा के बार - बार कहने पर अनुराधा जाने को तैयार हो गई।


उनके जाते ही निशा अपने खुद के सवालों में ही उलझ गई ******क्या मैंने सही किया? इन लोगों को अकेले भेज कर? कहीं मैं अपना घर खुद ही तो बर्बाद नहीं कर रही?

फिर खुद ही जवाब दे लेती******* अगर रुद्र को उसके पीछे जाना होगा तो क्या में उसे रोक लूँगी?! कहाँ -कहाँ उसके पीछे जाऊंगी।

कभी खुद को आईने में देख कर सोचती अगर इसके बाद सब कुछ ठीक रहा तो मैं अपने ऊपर भी थोड़ा ध्यान दूँगी। अनुराधा जैसी कमर पाना नमुमकिन तो नहीं। 

निशा का कहीं मन नहीं लग रहा था। जैसे ही कहीं बैठती लगता पैरों में जैसे गीली मिट्टी लग गई हो। कभी बिना वजह हाथ धोने लगती। तीन चार घंटे में उसे लग रहा था जैसे तीन चार जनम गुजर गये हो।

आखिर वो लोग वापिस आ गये। और साथ में कोई और भी था। अनुराधा के चेहरे पर पहले से ज्यादा संतोष था। और रुद्र की आँखें लाल थी जैसे बहुत रोये हो।


उसके कुछ बोलने से पहले ही अनुराधा ने निशा को गले से लगाकर कहा...... "थेंक्यूँ निशा हम पर इतना विश्वास करने के लिये। यकीन मानो हमने आपके भरोसे का कोई गलत फ़ायदा नहीं उठाया है। इंसान वहीं मुक्त होना चाहता है, जहाँ बंधन हो। पर जहाँ कोई भी बंधन न हो वहाँ से क्या आजाद होना।


वैसे हम दोनों को साथ भेज कर आपने बहुत अच्छा किया। सालों से मन में दबी शिकायतें, एक दूसरे के प्रति जो गुस्सा था वो सारा निकल गया।

पहले मुझे लगता था कि मुझ से अच्छी बीवी रुद्र को मिल ही नहीं सकती। पर आपसे मिल कर लगा कि आप मुझ से भी अच्छी है। थैंक्यू!! अब मैं भी चैन से आगे बढ़ सकूँ इसलिये मैं इन्हें भी रुद्र से मिलवाना चाहती थी।

अपने पास खड़े उन महाशय की तरफ इशारा करते हुये अनुराधा ने कहा! ये मिस्टर विकास है। मेरे साथ काम करते है। और अब हम दोनों शादी करना चाहते है।


निशा ये सुन खुश होते हुये बोली "अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है। "

और विकास से बोली "अब आप अच्छे से समझ लो ये मेरे पति है। मुझे इन पर पूरा भरोसा है। अपने भरोसे की मैंने अभी - अभी अग्निपरीक्षा ली है। तो आप भी अपनी बीवी पर पूरा भरोसा करना। "


रुद्र ने भी मुस्कराते हुये निशा को गले लगा कर कहा" थेंक्यू निशा मुझे पता है, तुम मुझे अनु के साथ भेजकर बहुत परेशान हुई होगी। पल - पल तुम्हारा विश्वास डोला होगा। पर फिर भी तुमने मुझ पर भरोसा करके अपने प्रति मेरा प्यार और बड़ा लिया! थेंक्यू!!

आज निशा ने अपने पति को अनुराधा के साथ शादी न कर पाने की आत्मग्लानि से मुक्त पाया था। और उस पर भरोसा करके हमेशा - हमेशा के लिये अपना बना लिया।

अनुराधा निशा से अपनी शादी में आने का पक्का वादा लेकर रुद्र की यादों को पीछे छोड़ विकास के साथ आगे बड़ गई!!

  


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