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V. Aaradhyaa

Romance

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V. Aaradhyaa

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उसके होंठो की हंसी बरकरार है

उसके होंठो की हंसी बरकरार है

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"मैं वादा करता हूँ कि आपकी बेटी को सदा खुश रखूँगा!"अजीत ने यही तो कहा था अंतरा के पापा से ज़ब वह उसका हाथ माँगने गया था।और.. अविनाश जी को अजीत की आवाज़ में एक सच्चाई दिखाई दी थी। आँखों में एक तेज़ और कुछ कर जाने के जूनून के साथ दिखा था... अंतरा के लिए बेशुमार प्यार...!


तभी तो अभिजात्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करनेवाले अविनाश जी निम्न मध्यमवर्गीय अजीत के साथ अपनी लाडली बेटी का हाथ देने के लिए मान गए थे।

 और... आज ज़ब अजीत अपनी लगन व मेहनत से कामयाबी के शिखर पर था तो उन्हें बहुत गर्व हो रहा था।

उससे भी बड़ी ख़ुशी की बात ये कि...अजीत ने अपना वादा निभाया था।उसने कभी अंतरा को कोई दुःख नहीं पहुँचाया!तभी तो आज भी अंतरा खुलकर मुस्कुराती है!

आज भी अंतरा के होंठों की हँसी बरकरार है!!



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