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Sanjana Kamat

Classics

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Sanjana Kamat

Classics

देवी कात्यायनी (षडाक्षरी)

देवी कात्यायनी (षडाक्षरी)

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तेजःपुंज दुर्गा

रूप कात्यायनी 

सहाव्या दिवशीं

देत्य संहारिनी


ऋषी कात्यायन

भक्त इच्छे जन्म

रूपा त्या प्रणाम

पावशी कायम


महिषासुराचा

वाढे अत्याचार

विनाशा प्रगटे

घेत तलवार


यमुना किनारी 

कृष्ण पती प्राप्ती

ब्रज गोपी पुजे

वर इच्छाप्राप्ती


भक्ती परिपूर्ण

साधका पावशी

योग साधनेत

उभी ती पाठीशी



साहित्याला गुण द्या
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