STORYMIRROR

Indu Kothari

Tragedy

4  

Indu Kothari

Tragedy

अंधविश्वास

अंधविश्वास

1 min
292

  जब दिल दिमाग पर फितूर हो जाता हावी

  और अज्ञानी भर देते अंधविश्वास की चाबी 

  फिर मानव अपना बुद्धि विवेक खो देता है

 खुद ही निज जीवन पथ में कंटक बो देता है


  अंधविश्वास का मकड़जाल उसे घेर लेता है 

  हाड़ मांस चूस वह तुमसे ही मुंह फेर लेता है 

  गर्त में धकेलती जाती उसकी नई आकांक्षाएं 

  मन में जन्म लेने लगती हैं अनेकानेक शंकाएं 

  

 अंधविश्वास जग के‌ लिए हलाहल से कम नहीं

 बुद्धि विवेक सोच विचार ज्ञान सुधा सम नहीं 

 कभी रंक से राजा बनवाने का दंभ भरवाता है 

 अंधविश्वास मानव से बड़ा अनर्थ करवाता है 

  

 अन्धविश्वास जब हमारे मन में घर कर लेता है 

 तब यह ज्ञान बुद्धि विवेक सबको हर लेता है 

 छीन लेता यह जीवन के सुख चैन सभी हमारे 

 इसके आगे नतमस्तक हो जाते अज्ञानी सारे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy