शिक्षक
शिक्षक
शिक्षक पूज्य सदा इस भू पर, पूजन देकर मान करो।
मान बढ़े नित पूजक का यहँ, नित्य गुरू गुणगान करो।
है हरता नित शिक्षक संशय, संशय शिक्षक पे न करो ।
हार वरे निज शिष्य जितावन, वीर महान का मान करो।।१।।
ज्ञान अशेष सदा शिष को वह, शिष्य सुधारन दान करे।
लौ नित ज्ञान जगा शिष के उर, वह उजियार महान करे।
दुःख अनेक सहे निज जीवन, कष्ट सुशिष्य अशेष हरे।
मारग शिष्य सदा सुख पूरण, ज्ञान विभास समस्त करे।।२।।
