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Vinay Sharma

Abstract

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Vinay Sharma

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क्या, इसकी वजह ये बैरी चाँद है?

क्या, इसकी वजह ये बैरी चाँद है?

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पहले कभी तुम्हारी आँखों में आँसू नहीं देखे

शायद आज वजह कुछ खास है।

किसी गहरे ज़ख्म की आहट 

आई आस पास है।

लम्बा वक़्त गुज़ारा है उसके साथ

या

बिताए सिर्फ कुछ पल है ?

जिसकी कमी आज लग रही तुम्हें

क्या

वो तुम्हारा कल है?

यू बैठी तुम गुमसुम क्यों

तारों की छाव में

क्या 

इस ज़ख्म का गुनहगार 

ये बैरी चाँद है!

पहले तो कभी इतना चुप नही देखा

वजह कुछ तो खास है।

ज़ख्म भी गहरा है

और

किसी की याद भी आस पास है।


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