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Dr. Nidhi Priya

Abstract

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Dr. Nidhi Priya

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तूफ़ान आया

तूफ़ान आया

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दिल की तहों में दबाकर रखा था

दुनिया की नज़रों से बचाकर रखा था

तेरे प्यार की खुशबू को मैंने

अपनी साँसों में बसाकर रखा था


न जाने कहाँ से इक तूफ़ान उठा

तेज़ इतना कि उड़ा ले गया जज़्बात मेरे

आख़िर खुल ही गया वो राज़ जिसे

एक अरसे से मैंने छिपाकर रखा था


डर है मुझे कहीं कोई ठोकर न लगे

कहीं मैं राह भटक जाऊँ और मंज़िल न मिले

टूट कर बिखर जाए न वो सपना मेरा

बड़ी हसरत से जिसे पलकों पे सजाकर रखा था


क्या मैंने प्यार करके की है कोई ख़ता

जो हो गए हैं इस कदर सब मुझसे खफ़ा

आखिर ऐसा क्या बिगाड़ा है किसी का मैंने

फ़कत ख़्वाबों में एक छोटा-सा घर बनाकर रखा था।


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