STORYMIRROR

Dr. Nidhi Priya

Abstract

4  

Dr. Nidhi Priya

Abstract

तूफ़ान आया

तूफ़ान आया

1 min
726

दिल की तहों में दबाकर रखा था

दुनिया की नज़रों से बचाकर रखा था

तेरे प्यार की खुशबू को मैंने

अपनी साँसों में बसाकर रखा था


न जाने कहाँ से इक तूफ़ान उठा

तेज़ इतना कि उड़ा ले गया जज़्बात मेरे

आख़िर खुल ही गया वो राज़ जिसे

एक अरसे से मैंने छिपाकर रखा था


डर है मुझे कहीं कोई ठोकर न लगे

कहीं मैं राह भटक जाऊँ और मंज़िल न मिले

टूट कर बिखर जाए न वो सपना मेरा

बड़ी हसरत से जिसे पलकों पे सजाकर रखा था


क्या मैंने प्यार करके की है कोई ख़ता

जो हो गए हैं इस कदर सब मुझसे खफ़ा

आखिर ऐसा क्या बिगाड़ा है किसी का मैंने

फ़कत ख़्वाबों में एक छोटा-सा घर बनाकर रखा था।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract