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Govardhan Bisen 'Gokul'

Abstract Others

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Govardhan Bisen 'Gokul'

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मोरो कविता का रंग

मोरो कविता का रंग

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काव्यशास्त्र व्याकरण, येकी नही मोला जान |

लिखु  कल्पनाको  सार, बन  कविता सुजान ||धृ||


मोरो कवितामा जुळ्या, शब्द शब्दकाच मोती |

सुच्या यमक श्रृंगार, कृपा वाग्देवीकी होती ||

लेखनीला मिली धार, येकी नही मोला जान |

लिखु कल्पनाको सार, बन कविता सुजान ||१||


मोरो कविताका सुर, जसी बोली कोयलकी |

गुंज सबको कानमा, खण खण पायलकी ||

सारेगामा कसा आया, येकी नही मोला जान |

लिखु कल्पनाको सार, बन कविता सुजान ||२||


पसरसे कवितामा, गंध धरनी मायको |

देसे सुगंध मनला, घीव बखल सायको ||

कसी महक भरीसे, येकी नही मोला जान |

लिखु कल्पनाको सार, बन कविता सुजान ||३||


पशु पक्षी रव्ह सेती, सदा निसर्ग को संग |

असा साधासुधा सेती, मोरो कविताका रंग ||

कसो बनेव मी कवी, येकी नही मोला जान |

लिखु कल्पनाको सार, बन कविता सुजान ||४||


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