युवावर्ग में बढ़ती आत्महत्या
युवावर्ग में बढ़ती आत्महत्या
रोहन स्कूल से घर आते ही चुपचाप अपने कमरे मेंं जा बिस्तर पर लेट गया।
रोहन, रिया और आकाश का इकलौता बेटा था। वह दसवीं कक्षा मेंं था।अभी अभी त्रैमासिक परीक्षा खत्म हुए थे।और परिणाम का दिन भी आ गया।
वह रोज घर आते ही माँ, माँ चिल्लाते हुए सीधा रसोईघर में चला आता था, लेकिनआज क्या हुआ ?वह आते ही अपने कमरे मेंं चला गया, यह सोच रिया उसके कमरे में गई "उठ, रोहन सो क्यों रहा है, आज तो मैंने तेरा फेवरेट वडासांबर बनाया है कुछ खा ले।
"नहीं माँ मुझे भूख नहीं है।"
कुछ हुआ क्या स्कूल मेंं, आज तो तेरे पेपर्स आनेवाले थे ना, क्या हुआ पास तो हो गया ना तू ?"क्या हुआ कुछ तो बता !
मुझे नहींं पता "मेंम ने आप दोनों को बुलाया है। कल२बजेआपको और पापा को स्कूल आना है।"
रिया समझ गई कुछ तो बात है, पर इस समय उससे बात करना सही नहींं होगा। जवां खून है कही कुछ कह दिया और गुस्से मेंं आकर कोई गलत कदम उठा लिया तो उसका परिणाम पूरे परिवार को भुगतना पडेगा।
शाम को जब आकाश घर आया"सुनो, आकाश कल रोहन का ओपन डे है, और हम दोनों को स्कूल बुलाया है"।वह स्कूल से आया तब से बहुत परेशान है यूं ही कमरे मेंं लेटा हुआ है ना कुछ खाया ना कुछ बोल रहा हैं ।पर फिलहाल आप उससें कुछ मत कहना।कल बात करेंगे उससें।
"अरे ! कल क्या बात करेंगे फेल हो गया है तुम्हारा लाडला स्कूल से प्रिंसिपल का फोन आया था। पूरे दिन मोबाइल से चिपका रहता हैं ९०% नहीं कम से कम पास हो जाये उतनी मेंहनत त़ो करें।आकाश बोले जा रहा था।
"कल बात करते है ना आकाश रात बहुत हो चुकी हैं।मै उसे समझाऊंगी।"
अगर समझना होता तो कब का समझ गया होता। लेकिन इसके तो कानों तले जूं तक नहींं रेंगती।
किसी तरह रिया ने आकाश को चुप कराया।
सुबह रोहन तैयार होकर स्कूल चला गया। रिया ने सोचा स्कूल से आकर ही बात करना ठीक रहेगा। ठीक २ बजे वे दोनों भी स्कूल पहुंच गये।
टिचर" आपका बेटा सारे विषयों मेंं फेल है। १०० में से ४-५ अंक आये हैं ।आप ही बताये हम क्या करें ?" इस बार उसके बोर्ड की परीक्षा हैं। पहले तो वह ऐसा नहींं था तो अब क्पा हो गया ?आपको उसपर ध्यान देना होगा, वरना उसका पास होना मुश्किल है ।स्कूल में भी वह पढाई पर ध्यान नहींं देता या तो दोस्तों से के साथ मिलकर शरारत करता है, या फिर सोता रहता हैं।अगर उसे कोई समस्या है तो आपको उससे बात करनी चाहिए।
"हाँ, मेंम ये तो हम जानते है लेकिन आजकल बच्चों को मोबाइल से फुर्सत कहा"आकाश ने कहा।
रिया "आगे से हम पूरा ध्यान रखेंगे और आपको शिकायत का कोई मौका नहींं देगें।"
टीचर"वो तो ठीक है पर आज रोहन स्कूल क्यों नहीं आया ?"
लेकिन मेंम वह तो सुबह ही रोज की तरह घर से स्कूल के लिए निकल गया था।
मेंम ने रजिस्टर चेक किया, और क्लास के बच्चों से भी पूछा। लेकिन वह तो आज स्कूल आया ही नहीं।
यह सुनते ही रिया के तो जैसे होश ही उड गए। और आकाश तो बदहवास हो वही गिर पडा ।
"वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगी कहाँ गया मेंरा रोहन ? किसी ने देखा मेंरे रोहन को कहाँ गया होगा मेंरा बेटा कल रात से कुछ नहींं खाया।बात भी नहीं की।"
ओपन -डे था तो आते जाते हर अभिभावक उन्हें देख रहे थे। कोई दिलासा दे रहा था। कोई उनके दुख में दुखी हो रहा था।
रिया तो जैसे पगली हो गई थी "आपसे मना किया था ना मैंने कुछ मत कहो। शांति से बात करेंगे पर आप सुनते कहा हो, अब कहा ढूंढेंगे उसे कोई मेंरे बेटे को ढूंढो, कोई तो बता दो।"आकाश तो जैसे सुन्न सा हो गया था।
इतने में किसी ने पुलिस कम्पलेंट की तो पुलिस भी आ गई।स्कूल के बाहर सीसी टीवी कैमरे चेक किये तो पता चला कि वह स्कूल तक तो आया था, लेकिन स्कूल के अंदर नहीं गया।
हर कोई मोबाइल मेंं रोहन का फोटो फोरवर्ड कर रहा था ।खबर आग की तरह फैल चुकी थी।
पुलिस भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी। पूछताछ करने के बाद और सारे कैमरे चेक करने पर पता चला कि वह १-30बजे बीच के आसपास देखा गया। लेकिन उसके आगे उसे नाही किसी ने देखा नाही कही ट्रेस कर पाये।
रिया और आकाश का रो रोकर बूरा हाल हो गया था। परिवार वाले उन्हें सांत्वना दे रहे थे। पर उनके दिल पर क्या बीत रही थी वह उनसे बेहतर कोई नहींं समझ सकता था। रिया के मन मेंं सारे नकारात्मक विचार आ रहे थे। वह अच्छा सोचना चाहती पर वह अपने आप को इस मुश्किल घड़ी में समझा नहीं पा रही थी ।उसे भी अपने बच्चे के भविष्य की चिंता थी पर हमेंशा उसे इसी बात का डर लगा रहता इसीलिये वह चुप थी।
शाम के ७-८बजे थे अचानक मोबाइल की रिंगटोन बजी।
"देखो, आकाश देखो कई रोहन की कोई खबरकांपते हुए हाथों से आकाश ने कॉल उठाया।
सामने से आवाज आईहेलो, आकाश जी !
हाँमै, मै आकाश आप कौन ?
मै सुनिल बात कर रहा हूँ ।आपका बेटा मेंरे घर पर है ।
क्या ?
हाँ अभी अभी व्हाट्सएप से पता चला तो मैने आपको फोन किया। मैं अपना पता भेज रहा हूँ, आप जल्द से जल्द आ जाये।
आकाश और रिया सुनिल के घर पहुंचे
रोहन रिया को देखते ही उसके गले लग जोर जोर से रोने लगा "आइ एम सॉरी मम्मा, पापा मुझे माफ कर दो ।"आज से मै मन लगाकर पढाई करुंगा और आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगा।पापा मुझे माफ कर दो।माँ ने रोहन को गले से लगा लिया सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नहीं कहते।
कुछ ही देर मेंं तो पुलिस भी वहाँ आ पहुंची। उन्होंने सुनिल से पूछताछ शुरू कि सुनिल ने बताया।
मै हर रोज की तरह शाम के ६बजे बीच के वहाँ टहल रहा था। तब मैने अचानक देखा कि कोई बच्चा समुद्र में डूब रहा है ।वहाँ कुछ लोगो की मदद से मै उसे बाहर ले आया। वह खुद को संभाल पाये उस हालत मेंं नहीं था। इसिलिए मै उसे अपने घर ले आया हमने इससे से काफी पूछताछ की लेकिन वह कुछ भी बताने को तैयार नहींं था । वह बार बार जाने की जिद् कर रहा था, लेकिन मुझे शक था कि यह शायद आत्महत्या( सुसाइड अटेम्प्ट) का केस है इसिलिए मैंने उसे किसी तरह रोके रखा ।अभी अभी व्हाट्सएप ग्रुप मेंं मेंसेज देखा तो मैंने इसके घरवालों को फोन किया।
तो दोस्तों आज की युवा पीढ़ी मेंं बढती समस्या आत्महत्या के विषय को ध्यान मेंं रख मैने यह कहानी लिखी है ।आज मोबाइल और इंटरनेट के जमाने में हम अपने बच्चों से दूर होते जा रहे है। ना हमारे पास इतना पेशेंस हैं कि हम उन्हें समझ सके, न ही उनके पास उतना वक्त की वह हमें समझा सके यह एक गहन चिंता का विषय है।
