यादगार दीपावली
यादगार दीपावली
दिवाली का त्योहार रौशनी और जगमगाते दीयों का त्योहार है। पर कोविड काल में इस त्योहार पर भी जैसे ग्रहण लग गया था। ना बाजारों में जगमगाती रौशनी थी और ना घरों में। हर कोई कोविड महामारी से जूझ रहा था।
ऐसे में बहुत से सरकारी कर्मचारी, अपनी जान जोखिम में डालकर भी देश और जनता की सेवा कर रहे थे। खासतौर से अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारी।
ऐसे ही एक अस्पताल में मुरली और उसके साथी सफाईकर्मियों का कार्य करते थे। उनकी ड्यूटी कोविड ब्लॉग में ही थी। रोज़ गंभीर हालत में कोविड मरीज़ आते थे। उनमें से कुछ ठीक हो जाते थे और कुछ कभी घर वापस नहीं जा पाते थे।
दिवाली से एक दिन पहले मुरली और मनोहर की ड्यूटी बुजुर्गों के वॉर्ड में लगी थी। मुरली ने देखा कि वॉर्ड में सब लोग बहुत मायूस और शांत बैठे थे।
"अरे काका! क्या हुआ? आप सब इतने उदास क्यों लग रहे हैं?" मुरली ने पूछा।
"कल दीवाली है और….ना हम अपने परिवार से मिल सकते हैं ना दीवाली मना सकते हैं।" उनमें से एक बुजुर्ग ने कहा।
"कोई बात नहीं काका.. अगले साल बढ़िया तरीके से दीवाली मना लेना।" मनोहर बोला।
"बेटा…जीवन का क्या भरोसा। आज हैं कल नहीं हैं। अगला साल किसने देखा है।"
मुरली की आंखों में उनकी बातें सुनकर आंसू आ गए। उसने मन ही मन ठान लिया कि कुछ भी कर के इनकी इस दीवाली को खास बनाना ही होगा।
*************
"पर ये सब तू करेगा कैसे? डॉक्टर्स और बड़े अधिकारियों को पता चल गया तो नौकरी चली जाएगी।" मनोहर ने मुरली को समझाते हुए कहा।
"अब तो ठान लिया है, कोई साथ दे ना दे। मैं तो करके रहूंगा।" मुरली बोला।
बहुत सोच विचार के बाद मुरली को एक ऐसी जगह मिल गई जहां किसी को पता नहीं चल सकता था। पर उसके इस प्लान को सफल बनाने में सभी नर्सों का सहयोग आवश्यक था। इसलिए उसने सबसे बड़ी उम्र की नर्स से सम्पर्क किया और अपने विचार बताए।
"मुरली इसमें बहुत खतरा है। किसी को पता चला तो?"
"सिस्टर, आप उन बुजुर्ग लोगों की मन की व्यथा भी तो समझो। बेचारे, इतना बड़ा त्योहार अकेले अपने बिस्तर पर सड़ते हुए काटेंगे। हमारे एक प्रयास से उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी।"
"ठीक है, मैं अपनी कुछ विश्वास पात्र नर्सों से बात करती हूँ।" नर्स ने कहा।
**************
अगले दिन शाम सात बजे तक दीवाली पूजन की सभी तैयारियां हो गई। जगह थी पुराना स्टोर रूम। मुरली और मनोहर ने अपने साथियों और कुछ नर्स के साथ मिलकर उस कमरे को जगमगाती रौशनी से सुसज्जित किया।
तय किया गया कि रात आठ से दस जब कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं होता, तब सबको लाया जाएगा।
धीरे - धीरे सभी बुजुर्ग मरीजों को उस कमरे में ले आए। सब इकट्ठे हो गए।
"क्या चल रहा है कोई हमें बताएगा?" एक बुज़ुर्ग मरीज बोले।
"शशशश…आप सबसे निवेदन है कि कृपया शांति बनाए रखें। ज़रा सा भी शोर ना करें।" मनोहर बोला।
फिर मुरली ने धीरे -धीरे सभी लाइट्स ऑन कर दीं। कमरा जगमगा उठा। सामने मंदिर में लक्ष्मी जी की पूजा का सब सामान रखा था।
मनोहर सबसे वृद्ध महिला के पास गया और बोला, "आंटी जी आप सबसे बड़ी हैं, इसलिए लक्ष्मी पूजा आप करेंगी।"
उस महिला की आंखों में आंसू आ गए। सबका प्यार और अपनापन देख वह गदगद हो गई। सभी वृद्ध महिलाएं और पुरुष अपने हाथ जोड़ आंखों में उम्मीद की रौशनी लिए लक्ष्मी माँ की आरती गाने लगे। विधिपूर्वक पूजा सम्पन्न हुई।
एक नर्स ने सबके हाथों में एक - एक मोमबत्ती पकड़ा दी। सबने बहुत खुशी से मंदिर के आगे मोमबत्ती प्रज्वलित की। मोमबत्तियों की रौशनी से सारा कमरा रौशनी से भर गया। फिर मुरली ने मिठाई का डिब्बा खोला और सभी के मुंह में एक - एक मिठाई का टुकड़ा डाल दिया।
"बेटा, आज आप सबने मिलकर हमारे इस पर्व को यादगार बना दिया। यदि कोविड महामारी से हम बच कर घर वापस चले गये तो अगले साल की दीवाली तुम्हारे ही साथ मनाएंगे।" वृद्ध महिला बोलीं।
"इतना प्यार और अपनापन तो हमें हमारे अपनों से नहीं मिलता कभी। जितना प्रेम और सम्मान आप सबने दिया है। बहुत बहुत शुक्रिया आप सबका।" एक वृद्ध पुरुष ने कहा।
"आज आप सबके चेहरों पर इतने दिनों बाद मुस्कुराहट देखकर मन को बहुत तसल्ली मिल रही है। आप सब यहां से ठीक होकर घर जाएं, माँ लक्ष्मी से यही प्रार्थना है।" मुरली ने कहा।
सबने बहुत एतिहात बरतते हुए सभी को उनके हॉस्पिटल वार्ड में पहुंचा दिया।
उस दिन सबके चेहरे पर एक आत्मसंतुष्टि थी। कहीं दूर से इक्की-दुक्की पटाखों के चलने की आवाज़ आ रहीं थीं। सब बुज़ुर्ग अपने हॉस्पिटल बैड पर बैठे उन आवाज़ों को सुन रहे थे। भले ही यह दीपावली उनकी ज़िंदगी की आखिरी दीपावली हो सकती थी, पर यह सबसे यादगार बन गई।
