STORYMIRROR

Komal Talati "Shashi"

Classics

4  

Komal Talati "Shashi"

Classics

वो सतरंगी पल...

वो सतरंगी पल...

1 min
353

याद में ये दिल रवाना हो गया

आंचल में छिपना बहाना हो गया


चाँद को देख याद आए वो दिन

गोद मे तेरी सुलाना हो गया


ढुंढते रहते है तुझको हर तरफ

यह शरारतमै सताना हो गया


और तुमको ही हंसाना काम है

बात को मुझसे छिपाना हो गया


याद में जो आंखें नमी सी हो चुकी

'माँ' कि यादों का खजाना हो गया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Classics