वो खेपा सा लड़का
वो खेपा सा लड़का
ज़ब भी पहले प्यार की कोई बात आती है, मुझे अपनी जिंदगी में आए उस प्रथम पुरुष की याद आ ही जाती है।
उन दिनों मैं नाइन्थ क्लास में थी,ज़ब पापा का तबादला तिरुचिरापल्ली हुआ था।वहाँ हिंदीभाषी अल्पसंख्यक थे।पापाजी के कुलीग का बेटा था ओरोविंदो। वहाँ मेरा कोई दोस्त नहीं था। एक तो मैं हॉस्टल में रहती थी दूसरी मुझे तमिल ठीक से नहीं आती थी। औरोबिंदो से हमउम्र होने की वजह से अच्छी दोस्ती हो गई थी। हम दुनिया जहान की बातें करते और वह मेरी हर बात ध्यान से सुनता।
मुझे जरा सा भी खरोंच आ जाए तो वह चिहूंक उठता था।
केशोर्य के पहले सोपान पर ही उस लड़के ने
कराया था मुझे प्यार का एहसास।
मैं अक्सर उसे खेपा कहकर चिढ़ा देती और उस पर हँस लिया करती पर वह कुछ नहीं बोलता था।
एक दिन यूँ ही बातों बातों में उसे कह दिया था कि,
"मुझे तुम्हारे पेड़ के अमरुद बहुत अच्छे लगते हैं!"
और उसके बाद वह लगभग रोज़ मेरे लिए ताजे अमरुद ले आता था।कई बार पेड़ पर चढ़कर उसके हाथ पैर में लगे खरोंच मुझे दिखाता।
पर तब कहाँ समझती थी मैं कि वह मेरे लिए
कितनी सारी तकलीफ झेलता था।
छुट्टियां खत्म होते ही हॉस्टल जाना हुआ और वापस ज़ब अगली छुट्टियों में आई तब तक उसके पापा का ट्रांसफर हो चुका था।और तब मुझे उसका वहाँ ना होना बहुत अखरा था।
यह तो बाद में एहसास हुआ कि...
वो तो मेरी जिंदगी में मेरे लिए पहले प्यार की
सौगात लेकर आया था, जिसकी खुशबू से आज भी मेरा हृदय सुवासित होता रहता है।

