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Saroj Verma

Abstract


4.5  

Saroj Verma

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विवाह-एक खतरनाक व्यथा(३)

विवाह-एक खतरनाक व्यथा(३)

10 mins 201 10 mins 201

अभी तक आप सबने पढ़ा कि बुण्देलखण्डी शादी में मेहमान कैसे खून चूसते हैं, इनके सामने तो खटमल भी फेल है, मतलब कभी किसी का कुछ पूरा ही नहीं पड़ता, जिसको देखों वही मुँह बनाएं घूमता रहता है, तो शुरू करते हैं आगें की कहानी___

पिछली बार की तरह इस बार के भी सभी पात्र बदल दिए गए हैं, पिछले भाग के पात्रों का इस भाग के पात्रों से कोई लेना देना नहीं है।।

अब इधर लड़की वालों के यहाँ का हाल___

बेचारी रागिनी सारें मेहमानों को सम्भालते सम्भालते थक चुकी थी लेकिन उसने फिर भी हार ना मानी,वो लगातार ऐसे ही मेहमानों को हँसते हुए खुश करनें में लगी रही,लेकिन उसकी दोनों देवरानियों को जेठानी की तो जैसे कोई कद़र ही नहीं है, दोनों मुँह फुलाकर बैठीं हैं, ऊपर से ना काम ना काज,कोई कह भी देता है कि फुरसत क्यों बैठी हो तो बोल देतीं हैं कि है ना बड़ी जीजी की भौजाइयाँ और बहनें, उन्हें ही तो सबई मालिकी सौंप रखी है, हम भला कौन हैं उनके देवरानी ही तो हैं और फिर हमारे पति निखट्टू , हम तो वैसे भी जेठ जी के सहारे हैं, सो हमाई थोड़े कोऊ इज्जत है, इज्ज़त तो उनकी है जिनके पति रेलवे इन्जीनियर है, जैसे कि हमारी जिज्जी,तभई तो बिटिया का ब्याह इत्ती धूमधाम से हो रहो है,हम तो ठहरे गरीब !हमारी बिटियन का ब्याह ना जाने कैसे होगा, कौन करेगा हमारी मदद?

 बस रागिनी की दोनों देवरानियों का यही रोना रहता है हमेशा,जब कि रागिनी के पति शेखर ही पूरा परिवार सम्भाल रहें हैं, दोनों भाईयों को गाँव मे अलग अलग घर बनवा दिया है, जमीन दिलवा दी हैं खेती के लिए,दोनों भाइयों को पढ़ाने की भी कोशिश की लेकिन एक को शराब की लत है तो दूसरे को जुएँ की।।

हाँ ,तो बरात नाचते नाचते ,नशे में झूमते हुए चली जा रही हैं, दूल्हें के छोटे मामा जी नशे में धुत होकर नाच रहे थे कि किसी ने नाचते नाचते धक्का दे दिया तो सड़क के किनारें बनी नाली में जा गिरें,फिर तो जो घमासान युद्ध हुआ,पूछो ही मत,एक दूसरे के शर्ट्स के बटन टूट गए,बड़े फूफा जी ने बड़ी मुश्किल से झगड़ा शांत करवा पाया।।

जैसे तैसे बारात लड़की के द्वार पर पहुँची और महिलाओं में बारात देखने की जो होड़ लगती है तो भइया पूछो ही मत,हमारे यहाँ एक से एक हैवी साड़ी पहने गहनों से लदी हुई महिलाएं घूँघट काढ़कर खड़ी हो जाएंगी और एक दूसरे को धक्का दे देकर दूल्हे और बारात को देखनें का प्रयास करती हैं जैसे की अजायब घर से कोई अजीब चीज आई हो,वैसे दूल्हा ब्याह वाले दिन होता ही अजीब चीज है, उसे कितना गर्व होता होगा ना कि इतनी सारी औरतें और लड़कियां केवल उसी को घूर रहीं हैं लेकिन उसे नहीं पता कि ये दिन उसकी जिन्दगी का आखिरी दिन है कि लड़कियाँ उसे घूरे और वो लड़कियों को क्योंकि बाद में तो दुल्हन दोनों की आंखें नोंच लेगीं, उसके पति को घूरने वाली लड़कियों की और लड़कियों को घूरने वाले पति की।।

हाँ,तो दूल्हा देखने के चक्कर मे औरतों में भी धक्का मुक्की शुरू हो जाती हैं और बात गाली गलौच पर आकर खत्म होती हैं जो इस प्रकार हैं__

"इ का कर रही हो पूजा की मम्मी! तुम तो हमे दबाए डाल रही हो",गीता की मां बोली।।

"हम कहाँ दबाएँ डाल रहें हैं, तुमई तो खा खा के इतना मुटा गई हो",पूजा की मम्मी बोली।।

"तो का हम तुम्हारे ख़सम की कमाई खाते हैं,जो तुम हमें ऐसे कह रही हो,"गीता की माँ बोली।।

"सुनो,ख़सम पर ना जाओ,नहीं तो हम भी तुम्हारी सात पुस्तों की इज्जत उतार देगें", पूजा की मम्मी बोली।।

'हाँ...हाँ..हमें सब पता हैं कि तुम्हारी जवान बिटिया कौन से गुल खिला रही हैं", गीता की माँ बोली।।

"ये सुनो! तुम हमको ना बताओ ज्यादा, हमें भी सब पता है कि तुम्हारी बिटिया किन किन लौंडों के साथ फटफटिया में घूम घूमकर मुँह काला करती फिरती हैं", पूजा की मम्मी बोली।।

और वहाँ खड़ी सब औरतें झगड़ा सुलझाने के बजाय म़जे लेने लगती है, तभी वहाँ से कोई बुजुर्ग गुजरे और उन्होंने उन औरतों को शांत करवाया।।

अब द्वारचार की रस्म का समय था,अभी दरवाजे पर बरातियों का डान्स चल रहा था,तभी बनारसी साड़ी और गहनों से सँजी धँजी दुल्हे की छोटी बहन ने अपने गोद में लिए हुए बच्चे को अपने पति को देते हुए कहा कि लो सम्भालो जी!मै तो मुन्ने को लिए लिए थक गई हूँ और फिर मेरा मेकअप भी तो खराब हो रहा है, मैं जरा टचअप करके आती हूँ और मै भी तो थोड़ा नाचकर फोटो खिचवा लूँ और दूल्हे की बहन अपना बच्चा और पर्स अपने पति को थमाकर चली गई और कुछ देर मे टचअप करके लौटी और सबके संग नाचने लगी और उधर जीजा बच्चा सम्भालने मे लगा है, वैसे ऐसे गऊ जैसे पति बहुत कम ही यदा कदा देखने को मिलते हैं, मेरे ख्याल से अब ये प्रजाति दुनिया से लुप्त होती जा रही है।।

और उधर सबसे बड़ी सरकारी नौकरी करने वाला दूल्हे का बड़ा जीजा सबसे अलग बैठा था,वो अपने आप को ख़ास दिखाने की कोशिश कर रहा था,उसकी समझ से शादी मे छोटी नौकरी वाले ही ऐसी बेहूदगी से नाचते हैं,उसे कुछ लोगों ने नाचने के लिए घसीटा भी लेकिन उसने कहा कि दूर रहों, मेरा सूट खराब हो जाएगा।।

और भइया!लड़कियाँ चाहें लड़की वाले की तरफ की हो या लड़के वालों की तरफ की शादी में लड़कियाँ तो ऐसी नजाकत के साथ मुस्कुराती हैं, ऐसे इतराती हैं कि वही आज की मिस यूनिवर्स है और जैसे सबकी नज़र उस पर ही हो।।

और दूल्हें की बड़ी बहन के ऊपर ही ज्यादा जिम्मेदारी होती हैं तो खुद को ज्यादा मैच्योर दिखाने की कोशिश करती है, ज्यादा हँसना बोलना नहीं और कोई नाचने को कहें तो अपने स्थान पर ही खड़े खडे़ हाथ मटका देंगी बस और हिसाब किताब वाली डायरी भी उसके ही हाथों में होती है, खासकर उसकी नजर सयाने लड़के और लड़कियों पर ज्यादा होती है कि वो क्या गुल खिला रहें हैं।।

उधर दूल्हे के पापा बारात से कह रहें हैं कि जल्दी चलों,लेकिन नशे में धुत बाराती,उनकी कहाँ कोई सुनता है ऊपर से उनको भी नाचने के लिए भीड़ में घसीट लिया जाता है, वो भी थोड़ा सा मटक कर फिर से सबको हिदायतें देने लगते हैं और जहाँ लड़को ने दरवाजे पर देखा कि ऊपर छत से दुल्हन की सहेलियाँ उन्हें देख रही हैं तो और भी ज्यादा नाचने लगते हैं, लड़कियों को इम्प्रेस करने के लिए।।

और शादी में सबसे ज्यादा बिगड़ता है दूल्हे के बड़ा जीजा और फूफा , जब देखों तब कुछ ना कुछ शिकायत, हमेशा कुड़ कुड़ करते रहते हैं।।

और सबसे ज्यादा भाव दिया जाता है,दूल्हें के विदेश वाले दोस्त को,उसके खाने का पीने का हर तरह से ख्याल ज्यादा रखा जाता है क्योंकि सबको ये आशा होती है कि ये तो विदेश में रहता है, मँहगी चीजे ही इस्तेमाल करता होगा इम्पोर्टेड,कुछ ऐसा ना कह दे वो कि हमें शर्मिन्दगी उठानी पड़े और उधर दुल्हन की ओर की हर औरत उसे अपना दामाद,बहनोई,नन्दोई ,बनाना चाहती है और वो बार बार सबसे यही पूछता रहता है कि टाइम से तो लौट पाएंगे ना ! ऐसा नाहो कि मेरी फ्लाइट मिस हो जाएं,वो पूरा समय ये ही शोआँफ करता रहता है कि मैं विदेश मे रहता हूँ।।

अब जैसे ही बारात दरवाजे पर पहुँची तो दुल्हन की माँ ने अपनी सँजी धँजी बेटी को देखा और उसकी नज़र उतार कर फूट फूटकर रोना शुरू कर दिया___

"हाय...हमार बुइया...हमार सोनचिरैया... अब उड़ जाई,कैसे रहिबे हम अपनी मोड़ी के बिना,हाय...दइया...."

माँ की दहाड़े सुनकर होने वाली दुल्हन भी अपनेआप को कन्ट्रोल नहीं कर पाई और वो भी रो पड़ी,उसका रोना देखकर पार्लर वाली बोली___

"ये क्या?तुम रो रही हो,रोने से तुम्हारा मेकअप खराब हो जाएगा और मेरी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।।"

इतने में दुल्हन की बड़ी बुआ आ पहुँची और उसने देखा कि माँ बेटी दोनों ही रो रहे हैं तो अपनी भौजाई को समझाते हुए बोली___

" इ का भौजी! तुम रो रही हो,बेटी तो पराया धन होती है उसे एक ना एक दिन विदा ही करना पड़ता है, तुम इस तरह से अपना मन छोटा करोगी तो कैसे चलेगा,इ देखों तुम रो रही हो तो तुम्हें देखकर बिटिया भी रोने लगी,चुप हो जाओ और बिटिया को खुशी खुशी विदा करो।।"

अब का करें जिज्जी माँ हैं ना तो कैसें सम्भाले अपनेआप को आखिर जन्म दिया है, पालपोस कर इतना बड़ा किया है, दुल्हन की माँ बोली।।

वो हम भी समझते हैं लेकिन बेटी की माँ को तो दिल पर पत्थर रखना ही पड़ता है, अच्छा चलो आँसू पोछों अब जयमाला का समय हो गया है और बिटिया तू भी चुप हो जा और मेकअप ठीक करवा ले,वो लोग बस तुझे जयमाला के लिए बुलाने आने वाले हैं,दुल्हन की बड़ी बुआ बोली।।

अब जयमाला के लिए दुल्हन बाहर आई,कैमरामैन बोला__

थोड़ा धीरे धीरे चलिए ताकि हम लोग रिकार्डिंग ठीक से कर सकें, दुल्हन धीरे धीरे स्टेज की ओर बढ़ने लगी और उधर दुल्हन को देखकर दूल्हें की बाँछें खिल गई, दुल्हन की बहन और सहेलियों को देखकर दूल्हे के दोस्त बिल्कुल पान में डाले गुलुकंद के तरह हो गए, सभी लड़के रह रहकर एक दूसरे को कोहनी मारकर कह रहे थे___

देख..देख..वो रेड वाली क्या धमाका है यार!

अरे..तू उसे छोड़ वो ब्लू वाली कसम से आइटम... है आइटम...और उसे देख ना ग्रीन ड्रेस वाली को वो ही सबसे धासू है यार,इन सबको देखकर तो कसम से यार अब मेरा मन भी शादी करने को कर रहा है।।

दुल्हन स्टेज पर चढ़ी ही थी कि दूल्हे के दोस्त और देवर शुरू हो जाते हैं....

आइए भाभीजी...आइए..हमारा यार तो आपके दर्शन के लिए व्याकुल था।।

हाँ...हाँ...क्यों नहीं हम सब भी बहुत व्याकुल थे आपके दर्शनों के लिए,पीछे से दुल्हन के हट्टे कट्टे कजिन भाइयों ने आकर कहा।।

दूल्हे के दोस्त सहम गए, बोले कुछ नहीं लड़कियों को बस घूरते ही रहें,दुल्हन के रेस्लर जैसे भाई जो आ गए थे।।

जयमाला का कार्यक्रम शुरु हुआ,दूल्हे के दोस्तों ने दूल्हें को ऊँचा उठा लिया लेकिन दुल्हन के भाई भी इसलिए आए थे और उन्होंने दुल्हन को भी ऊँचा उठा दिया जिससें दुल्हन ने आसानी से जायमाला डाल दी।।

इसके बाद खाना पीना हुआ,दूल्हा और दुल्हन ने साथ में खाना खाया और बाकी दोस्तों को भी दुल्हन की बहन और सहेलियों के संग चुहलबाज़ी करने का मौका मिल गया,वहीं साथ में डान्स भी चल रहा था।।

लेकिन दूल्हे के बड़े ताऊ को ये सब पसंद ना आया ,वो बिफ़र पड़े ये देखकर कि लड़के लड़कियाँ साथ में डान्स कर रहें हैं और उन्होंने रंग मे भंग डाल दी,ऊपर से चढ़ा रखी थी तो मइया कसम जो तहलका मचाया उन्होंने कि दूल्हे के बाप की ऐसी तैसी कर दी,दूल्हे का बाप चुपचाप सुनता रहा,करता भी क्या बड़ा भाई है,बाप के समान है।।

जैसे तैसे ये मसला भी हल हो गया अब फेरों का समय था,पहले दुल्हन को चढ़ाव चढ़ा(गहने, कपड़े) फिर फेरे शूरू हुए,फेरे निपटाते निपटाते सुबह हो गई, दूल्हा और दुल्हन की कमर अकड़ गई, मण्डप में बैठे बैठे।।

कुछ देर के बाद कलेवा की रसम शुरू हुई, जहाँ लड़कियाँ इस ताक में थी कि दूल्हा अपनी जूतियाँ उतारे और हम चुरा लें,जिसे जूता चुराई की रस्म कहते हैं।।

दूल्हा भण्डार गृह में अपने भाइयों और दोस्तों के संग पहुँचा और जूते उतारे ही थे कि लड़कियों ने जूतियाँ चुरा ली।।

कलेवा कराते समय अब दूल्हे की बारी थी सास से रूठने की ये एक रस्म होती है,दूल्हा रूठता है और उसे अपनी सास से मुँह माँगा उपहार मिलता है, दूल्हे को उपहार में सोने की चेन मिल गई और बाकी लड़को को पाँच सौ पाँच सौ रूपए और खास भाइयों को हजार हजार रूपए।।

अब बारी थी , जूता चुराई की रस्म की,सालियों ने सबको द्वार पर छेंक लिया और नेंग माँगा, सभी लड़के मन्द मन्द मुस्कुराएं, एक बैग में से दूसरी जूतियाँ निकाली और दूल्हे को पहनाकर चलते बनें,सालियाँ मुँह देखती ही रह गई।।

और उधर नाश्ते में छोला भटूरा और जलेबियाँ देखकर फिर से ताऊ जी का पारा चढ़ गया उनकी कुड़ कुड़ फिर शुरू हो गई कि ना रात का खाना ढंग का था और ना अभी का ऊपर से दहेज का सामान भी कम दिख रहा है, जैसे तैसे उन्हें बड़े फूफा ने बड़ी मुश्किल से समझा पाया।।

अब विदाई का समय आ पहुँचा,दुल्हन की चुनरी की गाँठ में कुछ गेहूँ और पैसे बाँधे गए वो इसलिए कि तुम्हारा घर अन्न और धन से हमेशा भरा रहे और दुल्हन से भण्डार गृह में चावल छिड़कवाएं गए ताकि उसके जाने पर उसके मायके का अन्न कभी भी खतम ना हो ।।

अब शुरु हुआ दुल्हन का रिश्तेदारों के संग रोना,वो सबके गले लगलगकर खूब रोई और माँ को तो जैसे छोड़ ही नहीं रहीं थी,पापा के गले लगकर रोई और पापा ने विदा करने के लिए उसे में कार में बैठा दिया लेकिन वो कार से उतरकर फिर अपने पापा के गले लग पड़ी,पापा ने उसे दोबारा बैठाया और कार चल पड़ी,पीछे से सब अपने आँसू पोछते रह गए।।

समाप्त__

     

 



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