STORYMIRROR

Arun Gode

Tragedy

4  

Arun Gode

Tragedy

उपकार

उपकार

5 mins
232

एक दिहाड़ी मजदूर, अल्प भूधारक किसान बहुजन समाज के परिवार में जन्मे राकेश का शिक्षण गांव के पाठशाला में चल रहा था। माता-पिता दोनों मेहनत करते थे। स्कूल के शिक्षक किसान के पडोसी थे। उन्हे एक छोटी सी पुत्री थी। दोनों परिवारों एकही समाज से होने से उनके घनिष्ठ घरेलु संबंध थे। राकेश और परिवार के सभी सदस्य लडकी को बडे प्यार खिलाते। उस लडकी को भी उस परिवार के सदस्यों अच्छा लगाव हुआ था।दोनों में चार-पाच साल का अंतर रहा होगा। राकेश पढने में तेज होने के कारण पडोसी शिक्षक उसकी आर्थीक मदत जैसे फीस, किताबे अन्य करते थे।राकेश ने शालांत परिक्षा अच्छे गुनवत्ता के साथ उत्तीर्ण करी थी।आर्थीक तंगी के कारण माता- पिता राकेश को बडे शहर के महाविद्यालय पढाने में असमर्थ होनेसे पडोसी शिक्षकने मदत की थी। बारवी उसने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर ली थी। मार्गदाता शिक्षक की आर्थीक और नैतिक मदत के बदोलत राकेश जिल्हे के सायंस कॉलेज में पढने गया। राकेश खाली समय में दसवी के छत्रों को ट्युशन पढाता था। जीससे रहने और खाने- पिने का खर्चा निकल जाता था। माता-पिता और कडी मेहनत करके उसे आवश्यक मदत देते थे। मार्गदाता पडोसी शिक्षक का पुरा परिवार बहुत मान –सम्मान करता था।    रोहणी के पिता के दिमाग में शुरु से ही राकेश को अपना दमाद बनाने की योजना थी। दोनों परिवारों में रिश्ते को सहमती थी।    

    राकेश की पढाई चल्र रही थी। राकेश बहुत सिधा -सरल स्वभाव और सामान्य जीवन स्तर का लडका था। उसके साथ एक सुंदर,सुशिल व भावना प्रधान शांता नाम की लडकी भी थी। उसे राकेश के प्रति बहुत हमदर्दी थी। धीरे –धीरे वह राकेश के करिब आने लगी। बहुत अवसरों पर वे दोनों पढाई के संबंध में चर्चा किया करते थे।कभी राकेश उदास या परेशान दिखने पर उसे परेशानी की वजह पुछकर हमेशा मदत करती थी। धीरे- धीरे ये दोस्ती प्यार की दहेलीज पर आकर खडी हो गई थी। लेकिन राकेश ने अपने आप को शांता से प्रेम होने के बावजुद भी उससे दूरी बनाकर रखता था। उसे पता था कि वह अपने मार्गदाता का भविष्य में दामाद बनेगा!।

     दोनों ने सायंस में अच्छे गुनवत्ता के साथ पदवी प्राप्त की। शांता और राकेश बहुत खुश थे। शांताने राकेश से पुछा,अब आगे क्या करोगे ?। उसने बडे शहर जाकर, भौतिक्सास्त्र में स्नातकोत्तर करने की सोची।। शैक्षिक रेकार्ड अच्छ होने के कारण उसे सरकार की तरफ से गुनवत्ता छात्रवृत्ती मिलती थी। खाली समय में किसी कोचिंग क्लास मे जाकर आवश्यक पैसे का जुगाड करेगा। राकेश ने शांता से पुछा कि आप क्या करने वाली है ?। वह नाराज हो गई थी। शांता ने कहा मैं दिल से कुछ भी नहीं कर सकती। मेरे से छोटी दो बहने है। एक होम सायंस और दुसरी बारावी सायंस में पढती है। इसलिए परिवार ने मेरी इसी साल शादी करने की सोची है। ये सब बाते शांता उसे गंभिरता से आसु पोंछते हुयें बता रही थी।उसने हिम्मत जुटाकर राकेश के सामने शादी करने का प्रस्ताव रखा था। राकेश ने, मैं तुम्हे बेहद प्रेम करता हूं।राकेश ने अपने जीवन से जुडी हकिकत शांता को बताई। उसे सुनकर वह राकेश की मजबुरी समजी। दोनों ने अपना रास्ता बदल लेने में ही अपनी भलाई समझी। उसी में उनके पवित्र प्रेम की जीत है।

       राकेश पढाई के लिए बडे शहर चले गया था। उधर शांता की शादी हो गई थी। शांता छोटी बहन और रोहणी इत्तफाक से एकही सायंस के प्रथम वर्ष में दाखला लिया। शांता के बहन को शांता और राकेश के प्रेम संबंध की जानकारी थी। कॉलेज के छात्र अकसर उनके प्रेम कहानी की खुले आम चर्चा किया करते थे। रोहणी को भी राकेश के प्रेम कहाणी का पता चला। रोहणी प्रेमभंग हुयें लडके से शादी नहीं करने निर्णय किया था।

       रोहणी को किसी लडके से प्यार हो गया था। उसने उस लडके के साथ शादी का प्रस्ताव अपने माता-पिता के सामने रखा था।लेकिन मात-पिता राकेश को ही अपना दामाद, रोहनी ने राकेश की पुरी हकिकत बताने के बावजुद बनाने पर अडे थे। आखिर रोहणीने भाग कर उस लडके से शादी कर ली थी।

     शांता को इस हादसे से बहुत दर्द हुआ। राकेश के खुशी और खुशहाली के लिए मैंने इतना बडा त्याग किया था । लेकिन उसका नतीजा क्या निकला। वह गुमसुम और परेशान रहने लगी थी। उसके छोटे बहन अंजीली ने जानने की बहुत कोशिष की थी। लेकिन शांता ने कुछ नहीं बताया था।लेकिन अंजीली को छोटे बहन से पुरी हकिकत पता चलने शांता मजबूरी अंजीली को समझ में आई थी।   

    उधर राकेश भी कॉफी नाराज था। वह इस हादसे से बाहर आना चाहता था। वह उसके जैसे गरिब, कमजोर, लाचार समाज के लडकों के लिए कुछ करना चाहता था। इस लिए उसने निर्णय लिया कि वह शिक्षा स्नातक की पदवी लेकर प्राध्यापक बनेगा। ताकि भविष्य में वह उसके जैसे छात्रों की मदत कर सके। वह उसने जिल्हा स्तर के कॉलेज में स्नातक की पदवी के लिए दाखला लिया। वहा उसकी मुलाखात शांता की बहन अंजीली से हुई। शांता और अंजीली एक जैसी दिखती थी। शांता निम्म गौरी, अंजीली का एकदम गोरा रंग था। कॉलेज के पुराने मित्र राकेश और शांता के प्रेम कहानी जानते थे। अंजीली भी धीरे- धीर राकेश के और राकेश अंजीली तरफ खिचती चले गये थे।

    राकेश को अंजीला का लगाव बहुत कष्ट दे रहा था क्योंकि वह सोच रहा था। इस रिश्ते से मुझे, शांता और अंजीली को भविष्य समस्या पैदा हो सक्ती है।अचानक राकेश को केंद्र सरकार के दफ्तर में चंदीगड नौकरी मिली। सबके भलाई के लिए उसने अपने माता-पिता को, मार्गदाता गुरु का आशीर्वाद लेकर वह अपनी नई जिंदगी बसाने चंडीगढ़ हजारों मील दूर अपने जन्मस्थान से हमेशा के लिए चला गया था।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Tragedy