Twilight Killer Chapter-16
Twilight Killer Chapter-16
उस जगह पर उजाला था पर उसकी शांति इतनी गहरी थी कि उसे अकेलापन कहा जा सकता था। वो किसी सामान्य कमरे जैसा था, सफेद टाइल्स से चारों तरफ घिरा हुआ, नया सा था। दोनों तरफ की दीवार पर 2-2 शावर लगे हुए थे जिनके नीचे धुंधले कांच के टेलिफोन बूथ जैसे शावर रूम से थे, एक तरफ से दरवाजा था वह पर कुछ बड़े-बड़े शीशे लगे हुए थे, वाशबेसिन थे, टॉयलेट सीट्स और पता नहीं क्यों एक बड़ा सा काले रंग का फ्रिज था, जिसके बगल में मोड़ कर रख सकने वाली 5 कुर्सियां एक साथ चपटी करके रखी हुई थी।
वह बाथरूम ही था क्योंकि आगे कमरे के कोने से थोड़ा आगे की ओर एक बड़ा सा बाथटब था जिसमे बर्फ के टुकड़ों के साथ पानी भरा हुआ था पर उसमे बर्फ ज्यादा थी उसके एक कोने से एक गोरा हाथ लटक रहा था, उस बाथ टब के अंदर कोई था जिसका चेहरा बर्फ की तरह सफेद पड़ चुका था पर पहचानना उतना भी मुश्किल नहीं था। वह ‘जय’ था!........और यह जगह शेली का अंडरग्राउंड बंकर था।
“तुम्हे, नहीं लगता अब हमें जय को उठा देना चाहिए, कब तक वह उस बर्फ में पड़ा रहेगा?” दरवाजा खुलते ही कोल की आवाज आई। उसके आगे चलते हुए शेली अंदर आयी थी।
“वह अभी नहीं उठेगा, मैंने उसे नींद का इंजेक्शन दिया था। अभी वह बहुत जल्दी-जल्दी काम कर रहा है, उसे आराम की जरूरत है वरना अपना और हमारा काम किये बिना ही मर जायेगा!” शेली, बाथटब के करीब आकर खड़ी हो गयी..जय का सफेद चेहरा देख कर बस वह देखती रही।
कोल ने उन फोल्डिंग चेयर्स में से 2 बाहर निकालीं और उन्हें बाथ टब से थोड़ा सा दूर लगा दिया, दोनों ने खुद को उस पर बिठाला। शेली के हाथ में एक कांच की स्क्रीन वाला टैब था जिसके कोने धातु की आधुनिक मशीनों से बने लग रहे थे।
“मैंने कल अपनी आंखों से जय की काबिलीयत को देखा है। वह परफेक्ट है!” कोल ने जैसे शेली से आग्रह किया “अगर आप उस से मदद करने को कहेंगी तो वह जरूर मान जाएगा। उसके जरिये हम अंडरवर्ल्ड में अपनी छाप और भी गहरी कर सकते है”
“जय कोई पैसों के लिए काम करने वाला भाड़े का टट्टू नहीं है” सहेली की आवाज इस बार कड़क थी “वह मेरा दोस्त है, शायद दोस्त से कहीं बढ़ कर! जय वैसे ही अपने लक्ष्य मैं बहुत परेशान है, उसे आगे पता नहीं कौन-कौन सी चुनौतियों का सामना करना होगा....और मैं नहीं चाहती कि वो अंडरवर्ल्ड के लफड़ों में एक बार फिर खुद को फंसा ले”
शेली की आवाज में किसी पुरानी याद की झलकार थी, शायद उस याद की छाप शेली के दिल पर कहीं ज्यादा थी।
“तुमने पता किया? आखिर वो चायनीज जो इस वक्त मुम्बई में घूम रहे है और जिनकी पहुंच करन तक थी, वह कौन है?” शेली ने पूछा
“हाँ, हमारा शक सही था। वो ‘वू क्लान’ के लोग है...चायनीज अंडरवर्ल्ड ने अपना पहला कदम यहीं, मुम्बई पर रखा है” कोल ने चिंतित स्वर में कहा “मुझे लगता है कि जर्मनी की पहाड़ियों में हुए उस अजीब से युद्ध से इन सभी का कोई-न कोई कनेक्शन है! न्यूयॉर्क में कुछ महीने पहले हुए उस अजीब से इंसिडेंट के बाद से ही सब कुछ अजीब ही हो रहा है”
“चलो! चलकर उन घटिया चायनीज अंडरवर्ल्ड वालों की कुछ खातिरदारी करते है। ......कुछ धमाकेदार” आंखों में ज्वाला लिए शेली बाथरूम से कॉल के साथ निकल गयी। उन लोगों के बीच क्या चल रहा था? उस बात की अभी पक्की खबर नहीं थी। पर किसी बुरी घटना की आशंका जरूर थी, चायनीज अंडरवर्ल्ड(वू क्लान) का मकसद क्या केवल नवल के द्वारा बनाया गया ड्रग था? ऐसे सवालों का कोई तुक नहीं था, जब चींटी को गुड़ की पूरी डगरी दो तो वो केवल खुद के कहने जितना लेकर चली नहीं जाती! बल्कि वो पूरी डगरी ही ले लेती है।
इस उधेड़बुन का नतीजा क्या गुल खिलाने वाला है, कहना मुश्किल है! पर शेली के जाने के तुरंत बाद ही झटके से जय की आंखें खुली, वह जाग रहा था!...इस पूरे समय...वह जाग रहा था....................
कुर्सियों का घेरा निहारिका की ओर लग चुका था, सभी जानना चाहते थे कि आखिर हर एक कड़ी ‘जय’ से कैसे जुड़ी हुई है? वह जहाँ भी कुछ गलत पा रहे है हर जगह पर ‘जय’ का नाम है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग वाला करन प्रसाद की जय के कभी पटी नहीं थी और उन दोनों का आपस में छोटा ही सही पर एक खतरनाक झगड़ा हुआ। और अब जब बारी ‘सौरभ’ नाम के एक शख्स की है तो वह भी जय से जुड़ा हुआ है?
हिमांशु की तरह ही हर कोई इस बात का जवाब चाहता था, एक बात तो अब सभी को कंफर्म हो गयी थी की अगर जय को अच्छे से जाना नहीं तो यह केस इसी तरह अटक कर रह जायेगा। एक बात का डर भी था कि कहीं ‘जय’ का यह केस कोई विकराल रूप ना ले ले। आसुना अंदर किचन से पानी की बोतल और एक कांच के गिलास निकाल लायी थी, निहारिका को पानी पिला कर शांत किया गया।
“कोई बुरी याद निकल आये और उस से तकलीफ हो, मैं इस तरह के मामलों में काफी समय लेता हूं पर मैं यह भी जनता हूँ कि निहारिका और आसुना दोनों ही बहुत स्ट्रांग वीमेन है” हिमांशु ने बहुत ही नरम आवाज में कहा “अगर तुम खों तो हम कुछ देर और रुक सकते है”
“नहीं....मैं ज्यादा इंतजार नहीं करवा सकती..... चुप रहने से वैसे भी कोई फायदा नहीं होने वाला” निहारिका बताने को तैयार हुई। पर उसी वक्त कुछ सोच में पड़े हुए अतुल के होंठ हिले
“तो..यह ‘सौरभ’.....कहीं ‘बलराम वर्गीय’ का बेटा तो नहीं है?” अतुल की बात सुनते ही सभी के चेहरे ऐसे सोच में पड़ गए जैसे उन्होंने यह नाम पहले भी सुना है! निहारिका ने हामी में सर हिलाया...टीना इस पर टिप्पणी करने वाली पहली थी,
“बलराम वर्गीय, वो मुम्बई के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट किंग थे जो? तुम उनकी बात कर रही हो?” टीना की बात ने सभी के मस्तिष्क की धूल लगी हुई किताब के पन्नो को साफ कर दिया। निहारिका ने भी सकारात्मक रूप से सर हिलाया!
बलराम वर्गीय! जितना भारी और तेजस्वी नाम है उतने ही दमदार इंसान थे वो। जब बंदरगाहों को प्राइवेट किया गया तो बिना झिझक और बराबरी के किसी प्रतिद्वंदी के उन्होंने मुंबई के सारे बन्दरगाह खरीद लिए थे। उनका पहले से ही एयरलाइन के जरिये इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट हुआ करता था पर वह केवल भारत और उसके 2-3 पास के पड़ोसी देशों तक सीमित था। मुम्बई के बन्दरगाह इसके एवज में इंटरनेशनल लेवल के सप्लायर रूट्स थे, खाद्य पदार्थो के अलावा कोयला पेट्रोल और लीगल हथियारों का भी लेन-देन यही से होता रहा था। पूरे 13 पोर्ट्स अब बलराम वर्गीय जी के हाथों में आ गए थे जिस से उन्हें गजब का मुनाफा तो हो ही रहा था साथ ही में उनका नाम पूरे भारत और दूसरे देशों में भी मशहूर होने लगा था। और इसी के जरिये उन्हें ‘इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट किंग’ के टाइटल से भी नवाजा गया था। पर उनके खुद के बेटे ‘सौरभ वर्गीय’ उनकी हत्या कर दी थी!
“सौरभ को देश से क्यों निकाल दिया था?” हिमांशु ने यह सवाल इसलिए किए क्योंकि उसे सच में इसका जवाब नहीं पता था, हालांकि टीना और अतुल को इसके बारे में कुछ-न कुछ पता ही था।
“हमारे देश की सबसे ताकतवर मिसाइल ‘अग्नि-8’ जो कि गुजरात से केरल जा रही थी....सौरभ ने वह बाहर दूसरे देश में भेजने की कोशिश की थी! किसी अज्ञात एकाउंट से सौरभ को अरबों में क्रिप्टो करेंसी भेजी गई थी” निहारिका ने शांत आवाज में कहा “उसका प्लान मिसाइल के जहाज को मुम्बई पोर्ट पर मेंटेनेंस के लिए ले कर मिसाइल को बदलना था और जब वो जहाज खाली मिसाइल का बॉक्स लेकर वापस समुद्र में जाता तो उसने उस जहाज को बम ब्लास्ट करके मैटर को खत्म करने की सोची थी। पर RBI को बहुत बड़े क्रिप्टो ट्रांजेक्शन की भनक लग गयी और जैसे ही CBI को पता चला उन्हें गड़बड़ लगी क्योंकि इंते सारे क्रिप्ट का आना और मिसाइल का भी मुम्बई पोर्ट पर ही होना कोई कोइनसिडेंट नहीं था। हालांकि इस बात की कंफर्म खबर...मैंने ही CBI को दी थी!”
सभी की आंखें चौड़ी हो गईं, वो सब हैरान थे क्योंकि निहारिका तो एक मनोचिकित्सक थी ह भला पोर्ट पर क्या कर रही थी?
“पर तुम तो एक मनोचिकित्सक हो न? तुम्हारा बन्दरगाह पर क्या काम....” हिमांशु का यह सवाल सभी की तरफ से था, आसुना बस सब कुछ सुन रही थी पर उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि वह यह सब जानती थी। निहारिका ने एक गहरी सांस ली,
“हम लोग उस समय इंटर्नशिप के लिए आये थे!....कर्मचारियों का मुफ्त में इलाज करके खुद को बेहतर जानने की कोशिश में थे” सभी इस बात पर सहमत हो गए
“मैंने सौरभ की बातें सुन ली थी इसलिए दूसरा कॉल भागते हुए CBI को किया था!”
“दूसरा कॉल? पहला किसे किया था फिर और तुरंत ही क्यों काल कर दिया था...मतलब बिना किसी सबूत के?” हिमांशु के साथ ही सभी के अंदर की जानने की उत्सुकता उन्हें और तड़पाने लगी थी।
“सौरभ ने मेरे सामने ही बलराम जी को मार डाला था, शायद उन्हें सौरभ के काम की भनक लग गयी थी इसलिए वो उसे रोकने आये थे पर उन्हें क्या मालूम था कि उनका खुद का खून उनका खून कर देगा” निहारिका ने अपने दोनों बाजुओं को मला, जैसे उसे ठंड लगी हो “तभी मैंने पहला कॉल जय को किया था!”
फिर निहारिका ने अपनी बात जारी रखी, उसने बताया कि सौरभ के आदमियों ने उसे पकड़ लिया था और उसके इंटर्नशिप वाले दोस्तों से दूर अलग ले गए थे। सौरभ स्कूल से ही जय से नफरत करने लगा था क्योंकि जय ने सौरभ जैसे ‘बुली’ के सामने घुटने टेकने की जगह के करारा जवाब दिया था। अगर उस दिन सौरभ के पिता बलराम वहां पर नहीं पहुंचे होते तो शायद जय सौरभ को जान से ही मार डालता। निहारिका को वहाँ पर देख कर उसका खून खोल उठा पर इस सब का फायदा उठाने की फिराक में उसने निहारिका के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, जय से नहीं तो उसकी बहन से ही वह बदला लेकर खुद को संतुष्ट करना चाहता था। उसे घसीटता हुआ वो पास के औजार रखने वाले कमरे में ले गया, जमीन पर पटक कर उसके कपड़े फाड़ने लगा, अब वह असल में इंसानी प्रवृत्ति पर उतारू हो गया था। निहारिका ने चीखने चिल्लाने की कोशिश की जिस पर सौरभ ने 2 थप्पड़ मार कर उसका सर जमीन पट पटक दिया जिस से वो बदहोश हो गयी, फिर निहारिका के शरीर से सारी शक्ति क्षीण होने लगी और सौरभ की हवस बढ़ने लगी। पर जय ने देर नहीं कि और अपनी कार ही घुसाते हुए पोर्ट के मेकैनिकल रूम में घुस आया, पहले उसने सौरभ को ढूंढा और उसे निहारिका से दूर किया। निहारिका को बेहोश और अधनग्न अवस्था में देख कर जय का माथा ठनक गया। सौरभ के 10 आदमी थे जिन्हें जय ने बिना परेशानी के ऐसे मार दिया जैसे वह सब कुछ आसान था, निहारिका की अधखुली आंखें इस नजारे को देख रहीं थी। उसके बाद सौरभ की खेर नहीं थी, जय ने सौरभ को जान से मारा नहीं बल्कि उसकी बुरी तरह से पिटाई की, जय किसी पागल से कम नहीं लग रहा था। CBI समय पर वहाँ पहुंच गई और पहले निहारिका को हॉस्पिटल पहुंचाया गया फिर जय को सौरभ से दूर किया। जय को जेल भेज दिया गया जबकि उस दौरान सौरभ पर मुकदमा चला उर देशद्रोह के इल्जाम पर निहारिका के बयान की मदद से उसे देश से निकाल दिया गया और मौत की सजा के बदले उसकी भारत की सारी संपत्ति से दखल कर दिया गया। जय को छोड़ दिया गया और सौरभ को श्रीलंका की समुद्री जेल में भेज दिया।
निहारिका की आपबीती सुनकर सभी को सौरभ के ऊपर बहुत गुस्सा आया, पर अतीत पर नाराजगी जताना किसी भी फायदे की बात नहीं थी, उसका कोई मतलब नहीं था। निहारिका के लिए वो सच में बहुत बुरी याद थी, वह अपनी इज्जत खोते-खोते बची थी, जय ने बिल्कुल समय पर आकर उसे बचाया था,
“पर अगर सौरभ जेल में है तो उसने यह सब कैसे किया?” टीना ने सवाल किया क्योंकि हिमांशु और अतुल इस वक्त चुप रहना ही ठीक समझ रहे थे
“वह जेल में नहीं है!” आसुना की बात ने सभी को चौंका दिया “जेल में रहने के 10 दिन के बाद ही वह जेल से भाग निकला था और उसके बाद से उसकी किसी को कोई भी खबर नहीं थी। सरकार और जेलर का मानना यह था कि वह समुद्र से बच कर नहीं जा सकता, वह जरूर शार्क एक शिकार बन गया होगा पर....!
आसुना की आंखें नीचे झुकी और....वह चुप रही
“पर, पर क्या आसुना?” अतुल ने पूछा
“जय को हमेशा से लगता था कि सौरभ बच गया होगा और किसी दूसरे देश में छुप कर रह रहा होगा। जय ने उसे ढूंढने की कोशिश की पर जब कोई सफलता नहीं मिली तो उसने सौरभ की तलाश छोड़ दी। मुझे आज भी वह रात याद है!....हम दोनों ने उसी रात शादी करने का फैसला किया था, जब हम जापान में थे”
इतनी सारी जानकारी शायद पुलिस या CBI के पास भी नहीं होती जो इस वक्त निहारिका ने बताया था। हिमांशु की टीम को अब कोई भी पुरानी फ़ाइल उठा कर जय और सौरभ को जोड़ कर देखने की जरूरत नहीं थी, उन्हें उसके जवाब मिल गए थे, फिलहाल! हिमांशु को अब पूरा यकीन हो गया था कि आसुना और निहारिका की मदद से वो जय और सौरभ तक जरूर पहुंच जाएंगे। निहारिका को लेकर आसुना अंदर कमरे में चली गयी, बाकी सभी ने के बार इसी बात पर विचार किया हिमांशु ने फैसला किया कि वो सभी ‘सौरभ’ का पता करेंगे और......जय अपने आप मिल जाएगा!
“मुझे लगता है कि उन चायनीज मशीनरियों का सौरभ से जरूर कोई कनेक्शन है!” पुनीत ने काफी देर बाद कुछ कहा, राम-राघव बात करने वालों में से थे भी नहीं, उन्हें बस तैयार होकर बंदूक उठाना ही आता था।
“सही कहा पुनीत, अगर करन के पीछे सौरभ का हाथ था तो सौरभ जरूर इन चायनीज मशीनरियों से जुआ हुआ होगा” टीना ने अपनी सहमति जताई
हिमांशु इस वक्त कुछ सोच में पड़ गया था, वह सोच ही रह था कि पहले क्या किया जाए? तभी उसका फोन बजा! हिमांशु ने फोन उठाया और कुछ देर कान से लगाये रखने के बाद उसके चेहरे पर तीखी हंसी थी। और कमरे का हर एक शक्श उसकी हंसी का कारण जानना चाहता था!
“आज रात एक बार फिर से तैयार हो जायो टीम!” हिमांशु का चेहरा किसी उत्साह में मग्न था
“समय है अंडरवर्ल्ड की एक मीटिंग अटेंड करने का!”
