तुम्हारे ख्याल
तुम्हारे ख्याल
अजय - हैलो , हाँ मेरी आवाज़ आ रही है ?
कृतिका - हाँ , आ रही है | मैने तुम्हे बस ये कहने के लिए फ़ोन किया है कि अब से मैने तुम पर लिखना छोड़ दिया है |
अजय (हँसते हुए) - चलो अच्छा है .... देर आये दुरुस्त आये |
(थोड़ा रुकते हुए ) पर सब ठीक तो है ना ?
कृतिका - हाँ बाबा .... बस तुम ही तो कहते हो ना अक्सर कि अपनी रचनाओं में मुझे मत डाला करो वरना दोनों की बदनामी होगी |
अजय - हाँ , तो सही तो कहता हूँ पर तुम मेरी सुनती ही कहाँ हो | चलो अच्छा ये बताओ कि अब किसपर लिखती हो ?
कृतिका ( बहुत ही भोलेपन से ) - तुम्हारे लिए आये हुए ख्यालों पर |
उद्देश्य - सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता बस उसका रुप बदलता रहता है |

