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Sushma Tiwari

Abstract

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Sushma Tiwari

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टूटे सपने

टूटे सपने

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"ए दूर हट ! हाथ मत लगाsssगाना गाती हूं मैं समझा ! दूर से बैठ कर सुन " सारा चीखते हुए उस नशे में चूर आदमी को परे ढकेलती है।

"ए तेरी हिम्मत कैसे हुई ? तेरे को हाथ लगाया तो तू गंदी हो जाएगी ऐसी कोरा कागज है क्या तू? इतना पैसा खर्च करके आया इधर मैं तू लाइव ऑर्केस्ट्रा में गाती है शास्त्रीय संगीत नहीं समझी जाने कौन सी मनहूस घड़ी में आया इस जगह मैं, पैसा टाइम और मूड तीनों खोटी हो गया " झल्लाते हुए अपने उतरे नशे को संतुलित करने के लिए पूरी ग्लास वो एक साथ गटक कर वहाँ से निकल गया।

" मनहूस घड़ी हाँ मनहूस घड़ी थी वो, जिस पल मैंने आकाश के सामने अपने प्यार का इजहार किया और ये सोच कर घबराती रही कि कहीं वो इंकार ना कर दे। पर नहीं उसने मेरे प्यार को रंगीन सपने दिखाए। बड़ा शहर, ऊंची इमारतें, मेरे गाने के शौक को शोहरत और ऊंचाइयों के सपने दिखाए। मैं भी उसके साथ घर से भाग आई। और वो मुझे छोड़ भाग गया मेरे प्यार की मंजिल ये अंधेरी गलियाँ होंगी सोचा ना था। काश कि उसने इंकार कर दिया होता तो इस आदमी जैसे लोगों की मूड बनने और बिगड़ने की मैं वजह ना होती "याद कर सारा की आँखों के कोनों से उसके टूटे सपने पिघल कर कुछ गर्म बूँदों के रूप में उतर आए।


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