तनहाई
तनहाई
यह एक दिल को छूने वाली प्रेम कथा है, जिसमें रिश्तों की उलझन, यादें और वह तूफान महसूस किया जाता है जो सच्चे प्रेमी के दिल में चलता है।
बरसात की रात थी, खिड़की से बाहर तूफान की आवाजें आ रही थीं। और सीमा, अस्पताल के एक वीरान कमरे में, बिस्तर पर अकेली, समीर को याद कर रही थी। उसकी हंसी, उसकी लहराती जुल्फें, अदाएं और प्यारभरी बातें, उसकी मोहक नज़रों की वो ताजगी – हर एक पल में वो जैसे उसके आसपास आ गया था, जैसे तूफान का हर झोंका हो।
कॉलेज की म्यूजिकल नाइट का वो गाना, जो समीर के साथ गाया था, उसकी गूंज सीमा के कानों में बज रही थी: "मुजकों इस रात की तनहाई में याद दिला कर परेशान मत किया करो।"
सीमा ने खुद को समाला और ठंडी आहें भरकर खुद से कहा, "सीमा, तुम अपनी चंद दिनों की खुशी के लिए समीर का सारा जीवन बर्बाद करने का अधिकार नहीं रखती।" लेकिन दिल, पागल दिल क्या जाने, वह हमेशा समीर का साथ चाहता था, जैसे उसकी धड़कन में बसा हो।
कभी-कभी, प्रेम एक तूफान जैसा होता है। वह बिना आहट जीवन में आता है, सब कुछ उथल-पुथल कर देता है। और जब वह जाता है, तो शांति के नाम पर बस वीरानी छोड़ जाता है। समीर ने उसे ऐसे ही छोड़ दिया था – लेकिन सीमा अपनी तनहाई के इस हालात के लिए खुद जिम्मेदार थी। बिना किसी अलविदा के।
पिछले हफ्ते, मेडिकल चेकअप की रिपोर्ट ने सब कुछ बदल डाला। जो गले पर उसे और समीर को नाज़ था, वह गले में ट्यूमर था और बायोप्सी में उसका रिपोर्ट कैंसर पॉजिटिव आया था। अब, बेजुबान ज़िंदगी में, सीमा समीर का भविष्य खराब करना कतई नहीं चाहती थी। वह हीरानंद ज्वेलर का एकलौता बेटा था, जो ढेर सारी दौलत का वारिस था, और शहर की कोई भी लड़की उसके साथ अपना जीवन बिताने को तैयार हो सकती थी।
सीमा, समीर को क्या खुशी दे सकेगी? उसने यही मुनासिब समझा कि अब वह समीर को अपनी बीमारी में शामिल नहीं कर सकती, इसलिए उसने "तुम भूल जाओ" ये तीन शब्दों का मैसेज लिखकर उसे अकेला छोड़ दिया और अपने गाँव लौट आई।
लेकिन अब, अकेली थी, तनहाई भरे दौर में समीर की सभी यादें उसे और भी कमजोर बना रही थीं। सुनहरे सपने तूफान की तरह आए थे, और जितनी तेजी से आए थे, उतनी ही तेजी से चले गए।
फिर भी, एक बात थी, जिसे सीमा ने ठान लिया था कि वह इस जन्म में और किसी से नहीं जुड़ेगी, और समीर उसके दिल के कोने में अंतिम सांस तक जीवित रहेगा। वह कहीं न कहीं हमेशा अपने दिल में बस के रहेगा। वह यादें, वह पल, वह मोहब्बत – सब कुछ तूफान की तरह था, फिर भी कुछ बाकी था। जैसे, उसकी यादें उसे खोने के बाद भी उसे नहीं छोड़ा था।
इस तरफ समीर को सीमा का यूँ बिछड़ जाना रास नहीं आया। उसने पीछा किया और सीमा के गाँव पहुँचकर सारी सच्चाई जानी। समीर ने किसी को बिना बताए अपने पिताजी से बात करके अमेरिका से डॉक्टर की एक टीम बुला ली और सीमा के ऑपरेशन का पूरा इंतजाम कर दिया।
सीमा या उनके घरवालों को कुछ पता नहीं चला, लेकिन इतना बड़ा ऑपरेशन सफल हुआ, और उसके गले की स्वर पेटी सुरक्षित रही।
सीमा को जो तनहाई से डर लगता था, वह अब लगाव जैसा महसूस होने लगा। उसे पछतावा हुआ कि उसने समीर को इतनी जल्दबाजी में छोड़ दिया, लेकिन अब क्या? चिड़ीया चुग चुकी थी। समय का पहिया चलता रहा।
सीमा ने अपनी तनहाई को एक और मोड़ दिया, उसने अपने आप को काम में व्यस्त कर लिया। उसने अपनी मैरेज इवेंट कंपनी खोल दी। वह अब जानी मानी गायिका थी, दौलत और शोहरत उसके पास थी, लेकिन सब कुछ होते हुए भी अंदर का खालीपन उसे परेशान कर रहा था।
एक दिन, उसे हिरानंद शेठ का आदमी समीर की रिंग सेरेमनी के लिए म्यूजिक इवेंट सेट करने का ऑर्डर दे गया। सीमा ने दिल थाम कर ये ऑर्डर लिया, और समीर की कोठी पर प्रोग्राम आयोजित किया। पूरे शहर की बड़ी हस्तियों की मौज़ूदगी में इवेंट सफल हुआ था।
अंत में, रिंग सेरेमनी के फाइनल इवेंट में, समीर ने कॉलेज इवेंट वाला गाने की अगली कड़ी से गाना शुरू कर दिया। सीमा ने दिल थाम लिया। समीर ने गाया, और उसकी आँखों में आँसू थे। जैसे ही गाना खत्म हुआ, समीर ने सीमा से पूछा, "क्या तुम मुझे कभी छोड़ सकती हो?"
सीमा की धड़कन रुक गई। उसकी आँखों में भी आँसू थे, लेकिन उसने समीर को जवाब नहीं दिया। उसने धीरे से अपना हाथ समीर के होठों पर रखा, और कहा, "समीर, तुम कभी दूर नहीं थे, आज भी तुम मेरे दिल में बसे हुए हो।"
समीर की आँखों में गहरी राहत थी। उसने महसूस किया कि उनका प्यार कभी खत्म नहीं हो सकता, चाहे वक्त कितना भी बदल जाए।
टैगलाइन:
"रिश्ते तनहाई मे बिछड़ते नहीं, जो दिल की गहराई से बनते हैं।"

