The 13th अध्याय 3
The 13th अध्याय 3
1 बजे हुए थे, उस इमारत में अब शांति थी जो कुछ समय पहले ही कोलाहल से भरी पड़ी हुई थी। किसी 5 स्टार होटल जैसे जगमगाते गलियारे से होते हुए वो काले चश्मे वाले व्यक्ति के पैरों की गूंज काफी तेज़ सुनाई दे रही थी, सामने मेडिकल रूम था। उसने जल्दी से कुछ कदम तेज़ करते हुए दरवाजा खोला
“ ओह, हाय मिस्टर अयामा”! उसकी आवाज सुन कर मिस्टर अयामा की जान में जान आयी
“ थैंक गॉड, यू आर आल राइट! (Thank God, you are all right) तुम्हें जमीन पर गिरता देख में तो डर ही गया था।" कहते हुए मिस्टर अयामा, बोजुई के पास लगी कुर्सी पर बैठ गए।
बोजुई अभी बेड पर पैर पसारे पीछे की ओर टिक कर बैठा हुआ था, उसके जबड़े पर पट्टी बंधी हुई थी। लाल पड़ी हुई गर्दन पर पॉलीथिन बर्फ भरकर लटकी हुई थी जो किसी नैक बैंड जैसी लग रही थी, बाकी सब ठीक ही था और वो अब भी अपने फाइटिंग वाले कपड़ों में ही था।
“ यहां के डॉक्टरर्स कहाँ है, क्या तुम्हें अकेले छोड़ कर चले गए?” आसपास देखते हुए वे कुछ असहज़ भाव से बोले
“ वो मेरा इलाज करके, सृजल के पास चले गए।"
“ आज अचानक हो क्या गया था बोजुई?” मिस्टर अयामा कुछ सोच में डूबे लग रहे थे “ अब तक तुमने लगभग 50 ऑफिसियल (Official) फाइट्स की है, एंड मेनी मोर उनओफ्फिशल (And many more unofficial)। कई बार तुम्हारा ओप्पोनेंट, हाइट और वेट (Height and weight) में तुमसे ज्यादा बड़ा था पर तुमने हर फाइट जीतीं। फिर आज.............”
बोजुई ने मिस्टर अयामा को हाथ दिखा कर उन्हें शांत रहने को कहा, वे चुप हो गए
“ देट बॉय सृजल (That boy Srajal), ही ट्रिकड माय इंस्टिनक्स (He tricked my instincts)। उसने अपनी रिएक्शन स्पीड (Reaction speed) शुरू से ही धीमीं दिखाई जिस कारण मैं उसके जाल में फंस गया। वो ताकतवर तो है ही, साथ ही उसके रेफलेक्सेस (Reflexes) काफ़ी तेज़ है या कह लो वो क्रिटिकल टाइमिंग पर अपने रिफ्लेक्सेस का यूज़ करता है।“ बोजुई की आवाज में चुनौती पूर्ण खुशी झलक रही थी
“सो यू लाइक हिज स्टाइल ( So you like his style)। वैसे अगर तुम अब ठीक हो तो हमे अपने कमरों में चलना चाहिए।" मिस्टर अयामा ने उठते हुए कहा
उनकी बात सुन बोजुई ने देर नहीं की, तुरंत उठ कर चलने लगा। वो दोनों बाहर निकले और उसी शांत गलियारे से होते हुए अपने कमरों की ओर जाने लगे
“ मुझे इस फाइट में चांस(Chance) देने के लिए थैंक्स अंकल और सॉरी(Sorry) मैं आपको जिता नहीं पाया।“ बोजुई ने मिस्टर अयामा से अपनी नजरें नहीं मिलाई
“शीsssssssssssश, तुम्हे किसी को बताना नहीं चाहिए कि हम रिलेटिव्स (Relatives) है।“ यह सुनकर बोजुई यूँ ही मुस्कुरा दिया “ वैसे क्या तुम्हें पता चला सृजल की फाइटिंग स्टाइल के बारे में? मैं तो कुछ खास ध्यान दे ही नहीं पाया।"
इस बार बोजुई के चेहरे जकी मुस्कुराहट बढ़ गई, जैसे उसने किसी रहस्य से पर्दा उठा लिया हो-
“ वो बॉक्सिंग को बेस (base) में यूज़ करता है ये तो उसके गार्ड (Guard) से ही पता चल रहा था, पर क्लोज कॉम्बैट (Close combat) में उसकी मुख्य स्टाइल कुछ ऐसी है जो बहुत कम ही देखने मिलती है”
“कौन सी स्टाइल है वो?” मिस्टर अयामा ने बहुत उत्सुकता से पूछा
“ सिस्टेमा (Systema)!!!
सिस्टेमा - मार्शल आर्ट की यह रूसी शैली 10 वीं शताब्दी की है। इस विशाल देश के पूरे इतिहास में, रूस को उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम से आक्रमणकारियों को खदेड़ना पड़ा। सभी हमलावर युद्ध और हथियारों की अपनी अलग शैली लेकर आए। लड़ाई अलग-अलग इलाकों में हुई, ठंड के मौसम में और भीषण गर्मी में समान रूप से, रूसियों के साथ अक्सर दुश्मन ताकतों की संख्या बहुत अधिक थी। इन कारकों के परिणामस्वरूप, रूसी योद्धाओं ने एक ऐसी शैली हासिल कर ली जो बेहद नवीन और बहुमुखी रणनीति के साथ मजबूत भावना को जोड़ती है जो किसी भी परिस्थिति में किसी भी प्रकार के दुश्मन के खिलाफ एक ही समय में व्यावहारिक, घातक और प्रभावी थी। कोई सख्त नियम, कठोर संरचना या सीमाएं (नैतिक लोगों को छोड़कर) होने के बावजूद शैली स्वाभाविक और स्वतंत्र थी। सभी रणनीतियां सहज प्रतिक्रियाओं, व्यक्तिगत शक्तियों और विशेषताओं पर आधारित थीं, विशेष रूप से तेजी से सीखने के लिए डिज़ाइन की गई थीं।
“अब कैसा लग रहा है सृजल?” आनंद ने उसे पीछे से देखते हुए कहा।
सृजल अभी भी अपनी उसी हालत में बैठा था जिसमें वो अभी फाइट करके आया था, एक दुबला पतला सा डॉक्टर जिसके बाल बिखरे हुए ऐंसे लग रहे थे जैसे उसे कंघी की जरूरत ही पड़ती हो, वो सृजल से पीठ के घाव को सी रहा था। सुई उसके घाव की आस पास की चमड़ी को भेदते हुए अपना काम कर रही थी जिसके कारण उस पर खून लग रहा था, टांका पूरा लगते ही डॉक्टर ने उसे रुई लगी हुई एक चौड़ी सी बैंडेज लगा दी।
“ इसका घाव भरने में कितना टाइम लगेगा डॉक्टर रॉय? और इसके बुखार का क्या हुआ?”
डॉक्टर रमन रॉय ‘रूबी फार्मसूइटिकल” के हेड(head) डॉक्टर है, वो न सिर्फ यहाँ पर पेशेंट्स(Patients) का इलाज करते है बल्कि यहाँ के मुख्य रिसर्चर(researcher) भी है। मेडीकल के मामले में उनका टैलेंट काफी एसक्सेप्शनल(ecxeptional) है।
“हाँ इसके घाव एक हफ्ते में भर ही जाएंगे और जहाँ तक बुखार का सवाल है तो वो उत्तर चुका है” डॉ. रॉय ने अपने मास्क और ग्लव्स(gloves) उत्तर कर अपनी जेब में रख लिए “पर मैंने ब्लड सैम्पल्स(blood samples) ले लिए है, टेस्ट के लिए।"
तभी वो नर्स ने अपनी ट्रे में से एक इंजेक्शन उठाया और इथेनॉल(इथेनॉल) से साफ कर उसे लगाने लगी तभी किसी के तेज कदमों की आवाज ने उसे रोक दिया
“मरने का बहुत शौक है क्या तुम्हें? जब तबीयत ख़राब थी तो लड़ने की क्या जरूरत थी?” रूबी भड़की हुए रूम का दरवाजा पटकते हुए अंदर आ गयी, उसका वो हसीन चेहरा गुस्से से तड़कता हुआ किसी चुड़ैल से कम नहीं लग रहा था।
“ और डॉक्टर रॉय!” क्रोध भरी आवाज में बोली “ जब आप सब कुछ जानते थे तो आख़िर क्यों आपने उसे लड़ने से रोका क्यों नहीं, हांssssss.......” डॉ. रॉय ने तो अपने हाथ खड़े कर लिए जैसे कह रहे हों कि इसमें मेरा कोई हाथ नहीं
“कितनी बार कहा है कि कोई भी गड़बड़ हो तो पहले मुझे बताओ! पर नहीं, हमें तो हर बात तुम सब आख़िर में बताते हो। अरे मैं यहाँ की मालिक हूँ और ऐसा लगता है जैसे मुझे कुछ बताना तुम्हें जरूरी ही नहीं लगता। अब तो तुम सो............”
उसकी बातें सुनकर सृजल ने बिना देर किए, उठ कर रूबी को गले लगा लिया। रूबी की ना सिर्फ बकबक बंद हो गई बल्कि उसका गुस्सा भी शांत हो गया
“ आई एम सॉरी रूबी(i am sorry, Ruby); मेरा तुम्हें परेशान करने का कोई इरादा नहीं था। पर अगर में आज नहीं लड़ता तो कंपनी को बहुत बड़ा नुकसान हो जाता जिससे तुम्हे दुख पहुंचता...... और ये मैं नहीं चाहता था।"
सृजल की बात सुनकर रूबी ने भी उसे गले लगा लिया, सृजल की बात सुनकर रूबी की आंख के कोने पर आंसू आ गए था।
“ अगर तुम्हारा हो गया हो तो...... सृजल को इंजे.....”
“चुप कर, छछून्दर कहीं का” रूबी की बात सुनकर को बेचारे आनंद का मुंह ही उतर गया। वो पीछे हट गया कि कहीं रूबी उसे कुछ फेंक कर मार न दे।
कुछ पलों के इंतज़ार के बाद रूबी ने उसे छोड़ दिया, सृजल वापस सोफे पर बैठ गया जहां पर वो नर्स उसे इंजेक्शन लगाने लगी।
“ वैसे ये इंजेक्शन किसलिए मिस अलका?”
“तुम, सवाल बहुत करते हो यार।“ नर्स अलका ने सृजल को इंजेक्शन लगते हुए कहा “ कॉर्टिकोस्टेरॉइड(corticosteroid), क्योंकि यहां पर टिश्यू रप्चर(tissue rupture) हो गए है। इससे इसके घाव पर इंन्फ्लामेशन(inflammation) नहीं होगा।"
अलका का काम खत्म होते ही वो और डॉक्टर वहां से निकल गए। अब कमरे में सिर्फ आनंद, रूबी और सृजल ही थे, सृजल कुछ दूरी पर लगे हुए कपड़े बदलने की जगह पर जाकर अपने कपड़े बदलने लगा। इसी बीच आनंद जाकर सोफे पर बैठ गया और पास रखे फ़ोन से उसने रिसेप्शन पर कॉल करके तीन ड्रिंक्स मंगवा ली। रूबी ने आनंद के सामने वाली गद्देदार कुर्सी पर अपनी जगह बनाई
“मुझे लगता है तुम दोनों को रात यहीं पर गुजार लेनी चाहिए; अब तो 1 बज गया है ना......”
“क्यों? तुम रात भर बोर हो जाओगी क्या?” आनंद ने आने हमेशा वाले मजाकिया अंदाज में कहा पर रूबी की खूंखार आंखे और फड़कती आंख देखकर वो फिर चुप हो गया। इतने में डोरबेल बजी, आनंद ने आने के लिए कहा और वो वेटर उनके लिए एक ट्रे में, 3 कांच के कप जैसे गिलास, एक विस्की की बोतल और अलग अलग शेप-साइज(shape-size) के बर्फ के टुकड़े ले आया। वो ड्रिंक बनाने लगा........
“ तुम रहने दो हम आपस में बना लेंगे।" आनंद की बात सुनकर वो वेटर वहां से आदर से चला गया, जाते-जाते दरवाज़ा लगा गया। आनंद ने उठा कर बर्फ गिलासों में डाला, विस्की की बोतल को खोला और तीनों गिलासों को आधा-आधा बार दिया।
इतने में सृजल बाहर आ गया, एक काली टी शर्ट और नीली जीन्स में। आकर वो आनंद के पास सोफे पर बैठ गया, आनंद ने उसे एक विस्की का गिलास दिया, फिर रूबी को देकर खुद ने पीना भी शुरू कर दिया।
“ तुम्हें कल से छुट्टी चाहिए थी न? तो तुम ले लो, अच्छा रहेगा।" रूबी ने अपनी विस्की को हिलाते हुए कहा
“ नहीं कल से नहीं, अब मैं 2 हफ्ते बाद ही छुट्टी लूंगा।"
“क्योंssssssssss!?” आनंद और रूबी की जैसे चढ़ते-चढ़ते उतर गई, क्योंकि पिछले हफ्ते ही सृजल ने छुट्टी की बात की थी पर अब अचानक से क्यों बदल गया?
“पहले में बाहर जाने वाला था, अब मैं कुछ दिनों बाद जाऊंगा।" सृजल ने पूरी विस्की गटकते हुए कहा
“पर तुम्हें जाना कहाँ है?” रूबी ने यूँ ही ये सवाल पूछ लिया
पर अगले ही पल रूबी को याद आया कि सृजल के बाहर जाने के पीछे कौन सी वज़ह है। उसने अपनी विस्की खत्म की और गिलास टेबल पर रख दिया। आनंद ने तो कुछ पूछा ही नहीं क्योंकि बाहर सुनते ही उसे किसी सवाल की जरूरत ही नहीं पड़ी।
“तो ठीक है, हम निकलते है। ज्यादा देर करना ठीक नहीं” सृजल के साथ आनंद भी उठ गया और वे दोनों जाने लगे।
“अपना ध्यान रखना दोनों!” रूबी ने पूरी बोतल उठा कर पीने से पहले उन दोनों को अलविदा किया।
बिल्डिंग से निकल कर दोनों जल्दी से आनंद की कार में बैठे, रात के मौसम बहुत सुहाना और ठंडा था। अमावस्या की रात में पूरा शहर जगमगा रहा था, कार की खिड़की खोल कर उन नें सफर शुरू किया। दोनों दोस्त पुणे की भीड़ भाड़ वाली जगह से दूर समुद्र तट के काफी नजदीक रहा करते थे, घर हालांकि सृजल का था पर अक्सर उसका समय कंपनी में ही गुजरता था जहां पर या तो वो काम करता रहता था या फिर ट्रेंनिंग(training)। सृजल का मुख्य काम इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट(import-export) को मैनेज(manage) करना था और आनंद सी. ए.(C.A.) था। दोनों यहाँ, इस कंपनी में एक साथ ही आये थे और क्योंकि दोनों स्कूल में बेस्टफ़्रेंडस( best friends) थे उनकी जोड़ी आपस में फिर से जमना शुरू हो गयी। 20 मिनट के अंतराल में उनका घर आ गया, घर क्या? वो तो बंगला था। सफेद दीवारें, कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियां, सामने एक बड़ा सा गार्डन जिसमें ज्यादा कुछ लगा नहीं था सिवाए कुछ नारियल के पेड़ों के और हरी घास के। कार को घर से जुड़े हुए एक गैराज में रख कर आनंद ने दरवाजा खोला आकर सीधे जाकर सोफे पर बैठ गया और राहत की सांस ली, सृजल भी जाकर वहीं पर बैठ गया।
बाहर से जितना शानदार था अंदर से उतना ही साफ सुथरा भी। दाईं तरफ कुछ ड्रॉर रखी हुई यही जिन पर कुछ फूलदान और 2 छोटे स्पीकर रखे हुए थे, थोड़ी दूरी पर दीवार से सटी हुई एक 56 इंच की एल. सी.डी.(LCD) लगी हुई थीं जिसके ठीक सामने एक बड़ा सा सोफा था और आजू बाजू 2 गद्देदार कुर्सियां। बाईं ओर से शुरू करते ही पहले एक लकड़ी का बना हुआ जूते-चप्पल रखने का स्टैंड था, वहीं दीवार पर काफी सारी तस्वीरें लगी हुई थी जिनमें कुछ स्कूल की थी तो कुछ अभी कंपनी की, उसी ओर से एक सुंदर सी लंबे पायदानों वाली सीढ़ी गयी हुई थी जो ऊपर के कमरे में खुलती थी। सीढ़ियों के ठीक नीचे आनंद का कमरा था और दूसरे कोने में किचन था; घर में सजावट जरूर काम थी पर साफ-सफाई के कारण सजावट की जरूरत ही नहीं मालूम पड़ती थी।
“ मैं सोने जा रहा हूँ आनंद, दरवाजा लॉक(lock) कर लेना।" सृजल सीढ़ियों से ऊपर जाने को हुआ
“यार एक बात पूछनी थी? इफ यु डोंट माइंड?(if you dont mind?)” सृजल ने हां के जवाब में सिर हिला दिया
“तुम्हें नहीं लगता सबकुछ जानते हुए भी रूबी, तुमसे प्यार करती है?” सृजल अपनी जगह पर ही खड़ा-खड़ा मुड़ गया और मुस्कुराते हुए बोला
“हाँ वो मुझसे प्यार करती है” सृजल की बात सुन कर जैसे आनंद का मुँह खुला का खुला से रह गया “पर वो मुझे एक सच्चे दोस्त की तरह प्यार करती है, अगर वो लड़का होती तो इस समय तेरी जगह पर आज मेरे साथ होती। समझे चौधरी जी”
सृजल जम्हाई लेता है अपने कमरे में चला गया, आनंद सोफे पर बैठे हुए ही मुस्कुराया जैसे उसे सृजल की बात समझ आ गयी। वैसे इतना कठिन भी नहीं था समझना, अक्सर हर कोई प्यार को गलत समझ लेता है और भला आनंद बाकियों से ज्यादा अलग थोड़े ही था। आखिर था तो समाज का हिस्सा ही; फिर उसने भी बत्तियां बुझाई और सोने चला गया।
पीक्सकिल पुलिस डिपार्टमेंट, न्यूयॉर्क
5 जुलाई 2030; सुबह 11 बजे!
पीक्सकिल में आज का दिन सुहावना था, अच्छी धूप निकली हुई थी। कभी-कभी भीड़ से घिरा हुआ शहर आज काफी खुल हुआ महसूस कर रहा था। यहां के पहाड़, वन और हडसन नदी प्रकृति की मौज में थे और लोगों का मूड भी बहुत खिला हुआ था। लंबी सड़कों पर गाड़ियां आराम से चल रहीं थी, लोग अपनी दुकानों पर काम कर रहे थे और बच्चे आज स्कूल न होने के कारण खेल कूद में लगे हुए थे।
एक हष्ट पुष्ट शरीर की सुंदर सी लड़की, ब्लैक जीन्स, व्हाइट टॉप पर ब्राउन जैकेट डाले हुए पुलिस स्टेशन की ओर बढ़ रही थी। उसके हल्के लाल से रंग के बाल कंधों से थोड़ा नीचे की ओर थे, एकदम सीधे ओर चमकीले, रेशम की तरह। वो सीधे पुलिस स्टेशन के अंदर गयी, शिकायत दर्ज करने वाले मेज़ के पास एक औरत बैठ हुई थी, घुंघराले बाल और गोल से चश्मा लगाए हुए
“गुड मॉर्निंग चीफ( good morning chief )”
“ मॉर्निंग मिसेस हिलसन।" वो लड़की उस पुलिस स्टेशन की चीफ थी, कहते हुए सीधे अपनी केबिन में चली गयी।
केबिन में एक बड़ी सी मेज जिसके ऊपर एक कांच की सीथ(sheath) चढ़ी हुई थी, जिसके पीछे दीवार पर पुलिस का सिम्बोल(simbol) बना हुआ था, दो अलमारियां रखी हुई थी, टेबल पर पेन-पेपर और एक लैपटॉप जिससे जुड़ कर एक प्रिंटर रखा हुआ था। वो जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ गयी और राहत की सांस ली। फटाफट उसने लैपटॉप पर कुछ खोला और एक क्लिक करके वापस कुर्सी से टिक गई। प्रिंटर पर कुछ छपने लगा जिसकी खर-खर की आवाज गूंजने सी लगी
“ मोर्निंग चीफ!” बाहर से जल्दी में एक युवा पुलिस अफसर जल्दी में आया
“ क्या बात है विल? इतने हड़बड़ी में क्यों हो?” उसके अचानक आने से चीफ चौक सी गयी।
“न्यूयॉर्क...... ह....पुलिस....ह....डिपार्टमेंट से फोsssssss... ह..न, फोन है।" विल अपनी भरी हुई सांस में बोला और चीफ को फोन थमा कर चला गया जिसकी स्क्रीन पर होल्ड(Hold) लिखा हुआ है पर कोई फोन नंबर नहीं था। उसने फ़ोन उठाया और कहा
“ हेलो, एलेनोरा हॉल स्पीककिंग ( Hello, Elenora Hall Speaking)”
ये फ़ोन कॉल लगभग 5 मिनट तक चली, इसी बीच बात करते हुए एलेनोरा ने प्रिंटर से उस कागज को निकाल कर देखा। फ़ोन कट करते ही उसने उस कागज को देखकर ऐंसा चेहरा जैसे कोई बहुत ही इम्पोर्टेन्ट चीज़ हो.............. फिर अगले ही पल उसे पहाड़ कर कचरे के डिब्बे में डाल दिया। बाहर जाते हुए उसने मिसेस हिल्सन से कहा
“मैं कुछ दिनों के लिए न्यूयॉर्क जा रहीं हूँ, तब तक के लिए विल सब संभाल लेगा।" मिसेस हिल्सन ने सिर्फ जवाब में अपनी गर्दन हिला कर स्वीकृति दिखाई।
बाहर जाकर एलेनोरा ने अपनी किआ सोरेंटो(Kia Sorento) में बैठी और तेज़ी से गाड़ी चालू करते हुए हाईवे की तरफ भगा दी। पुलिस स्टेशन वाले सभी लोग बाहर निकल कर एलेनोरा की भागती हुई को देखने लगे और उसके जाते ही वे वापस अंदर चले गए। अंदर एलेनोरा ने जो कागज पहाड़ के फेंका था उसका एक टुकड़ा पंखे की हवा में उड़ता हुआ बाहर आ गिरा, जिस पर लिखा हुआ था
‘रेजिग्नेशन लेटर!”
आखिर सृजल ‘बाहर’ कहाँ जाना चाहता था? और जब वो इसी हफ्ते जाने वाला था तो उसने प्लान बदल क्यों दिया?। सृजल, आनंद और रूबी की कहानी क्या है? एलेनोरा कौन है और अचानक आने वाला वो फोन कॉल किस लिए था? ऐसे सवालों के जवाब जानने के लिए हमारे साथ बने रहिये, जल्दी ही कुछ बहुत बड़ा होने वाला है , तो कहीं जाइएगा मत। यहीं मिलेंगे अगले शुक्रवार को।
