STORYMIRROR

सर्द रात

सर्द रात

2 mins
29.6K


 

 

क्या बताऊँ , उस सर्द रात जब तुमने ये बताया की तुम सिर्फ मुझसे मिलने आ रही हो और वो भी रात के ९.३० बजे , मेरे खयाल  उस  दहलीज़  को लांघ चुके थे जो सिर्फ तुमको एक प्रशंसक  के रूप में देखता था ,और ये सोचते सोचते मैंने अपने दाहिने जेब में पड़ी क्लासिक माइल्ड निकाल कर उसको बड़ी गर्म जोशी से फूंकने लगा |

हर कश के साथ मैं पुराने प्रेम को ,धुएें की चादर ओढ़ा कर निकालने लगा , मुझे ऐसा अहसास होने लगा था की चंद हफ़्तों में तुमसे इतनी करीबी सिर्फ संयोग मात्र नहीं है ,मगर संयोग हमेशा प्रेम की उन पुरानी मच्छरदानी के अंदर जाने से डर रहा था ,जिसके अंदर उसके प्रेम के मच्छर आज भी यादों की शक्ल में मुझको बेतरतीब होकर काट रहे थे |

मुझे सुकून चाहिए था , गहरा सुकून | ये सोच कर की पुरानी यादों के मच्छर को मारने के लिए किसी और के इश्क़ का मौटीन तो जलाना ही होगा , नहीं तो एक दिन औरों की तरह मुझे भी देवदास का डेंगू हो जायेगा , मैंने फैसला किया की मैं दिल का दरवाज़ा  फिर से खोलूंगा और उसको दिल की बात बताऊंगा |

हाँ इस बात का तो डर था ही की कहीं उसका जवाब ना हुआ तो मैं क्या करूंगा ? इस डर से मैं इतना डर गया की मैंने अपनी कहानी  यहीं छोड़ दी , ये सोच कर की अगर किस्मत में मौत के अलावा  कुछ और भी है , तो शायद वो भी समझ जाएगी और बिना बोले शायद हमारा इश्क़ अंकुरित हो जाये |

 

ऐसी अनकही कहानियो में हमेशा इंतज़ार करना पड़ता है , और सच बताऊँ उसको देख कर ये इंतज़ार मुझे छोटा लगने लगा है | मैं ये नहीं कहता की ये पूरा प्रेम है , मगर अधूरा ही ,है तो सही | मेरी उम्मीद मेरा प्रेम और वो , काफी होगा जीवन जीने के लिए | उसकी हाँ से बस ,जो जीवन का ब्याज है वो शायद कम हो जाये |


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Abstract