Shubham rawat

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4.0  

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सपने

सपने

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दिल्ली से मुम्बई जाने वाली ट्रेन बीच के एक स्टेशन में रुकती है। ट्रेन से उतरने वाले मुसाफिर उतरते हैं और सफर में जाने वाले ट्रेन में चढ़ जाते हैं। उसी ट्रेन के एक बोगी में बैठे दादा जी, अपने सामने बैठे लड़के से पूछते है, "बेटा क्या करते हो?"

"जी, मैं!" सामने बैठे लड़के ने कहा।

"हां, आप, बैठे-बैठे मन नहीं लग रहा था। तो सोचा आप से बात कर लूं।"

"अच्छा किया, टाइम भी बीत जायेगा!"

"तो बेटा, तुमने बताया नहीं क्या करते हो?"

"मैं नगर पालिका में काम करता था। अब मैंने नौकरी छोड़ दी है।"

 "क्यों?"

"मेरा मन नहीं लग रहा था काम में इसलिए नौकरी छोड़ दी। क्या-है-कि-ना मैं फिल्मों के लिए गीत लिखना चाहता हूँ। मेरा सपना रहा है हमेशा से इसलिए मुंबई जा रहा हूँ !"

उनकी बातें सुनके पास में ही बैठी एक महिला बोलती है, "मेरा सपना टीचर बनना था। पर मुझे मेरे पापा ने ज्यादा पढा़या नहीं। वो मुझसे कहा करते थे, 'लड़कियां ज्यादा पढ़ लिख कर क्या कर लेंगी!' पर मैं जब भी अपने बच्चों को घर में पढाती हूँ, तो मुझे ऐसा लगता है कि मेरा सपना पूरा हो गया है!"

महिला, दादा जी से पूछती है, " आपने अपना सपना पूरा किया?"

"नहीं बेटी! मैं बॉक्सर बनना चाहता था। पर कौन कितने पैसे कमाता हैं लोग तो इसे ही सफलता समझते हैं!" दादा जी ने जवाब दिया।

 इन सब की बाते सुनकर पास बैठे आदमी ने कहा, "आपका पौता है ना। वो आपका सपना पूरा करेगा!"

"अगर मेरा पौता मेरा सपना पूरा करेगा। तो उसके सपने का क्या?" दादा जी ने कहा।

  



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