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Amit Singhal "Aseemit"

Drama Romance Tragedy

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Amit Singhal "Aseemit"

Drama Romance Tragedy

समुद्र का किनारा

समुद्र का किनारा

2 mins
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  हम हमेशा की तरह इसी समुद्र के किनारे बैठे थे। ठीक आज ही के दिन की तरह उस दिन भी शाम अपने ढलान पर थी और हम दोनों न जाने कौन सी दुनिया में गुम थे। 


   माहौल एकदम शांत था। लहरें बार बार किनारों से टकराकर शोर कर रही थीं। 


   हम दोनों पूरी तरह मौन थे। लेकिन हमारा मौन बहुत बातें कर रहा था क्योंकि हम दोनों की नज़रें एक दूसरे पर टिकी हुई थीं और हम दोनों के चेहरों पर मुस्कान आ जा रही थी। जैसे कि उनके सवाल पर मैंने जवाब दिया हो और वे समझकर मुस्कुरा दिए हों। वैसे ही मेरे सवाल पर उनका जवाब आया हो और मैं समझकर मुस्कुरा दिया हूं।


   दो ढाई घंटों तक मौन के बतियाने का यही सिलसिला चलता रहा। फिर अचानक वे बोल पड़े,


   "अब घर चलें...!!"


   मैंने मुस्कुराकर अपनी गर्दन हिलाकर सहमति जता दी। चूंकि हमारा घर वहां से ज़्यादा दूर नहीं था, तो हम पैदल ही चल देते थे, हाथों में हाथ डाले हुए। 


   अगली सुबह उनके फ़ोन पर कॉल आई...एक बेहद दुखद ख़बर के साथ। उनकी माता जी का कल शाम निधन हो गया था। यह लगभग उसी समय हुआ था, जब हम दोनों समुद्र के किनारे रोमांटिक मूड में बैठे हुए थे।


    उनका रोते रोते बुरा हाल हो गया था। हम फटाफट कुछ सामान बांधकर उनके माता पिता के घर चल दिए थे...!!


   अगली शाम समुद्र का किनारा हमारा इंतज़ार करता रहा...!! लहरें किनारों पर हमें ढूंढने आती रहीं...!! मगर उन लहरों को हम नहीं मिले...!!


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