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Kanchan Hitesh jain

Tragedy

3  

Kanchan Hitesh jain

Tragedy

बदले की आग

बदले की आग

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आज पुष्पा जी बहुत खुश थी और क्यों न हो उनके छोटे और लाडले बेटे की शादी जो थी। छोटी बहू रीमा से बडी उम्मीद थी पुष्पा जी को क्योंकि बडी बहू और बेटा तो उनकी उम्मीदो पर खरे नहीं उतर पाये। बडी बहू तो उन्हें आंख फूटे नहीं सुहाती थी पर उन्हें पूरा विश्वास था कि छोटी बहू तो खरा सोना हैं। लेकिन उन्हें डर था कि बडी बहू सपना रीमा को भी ना बिगाड़ दे। और इसिलिए उन्होंने अपने सुखी बुढापे का ख्याल करते हुए रमेश की शादी से पहले बडे बेटे बहू को घर से अलग कर दिया।

जब नई बहू घर आई तो शुरुआत में सब कुछ अच्छा था पुष्पा जी अपनी बहू पर जान लुटाती थी। यह सब ज्यादा दिन तक नहीं चला क्योंकि पुष्पाजी का नेचर कंट्रोलींग ,शक्की, और गुस्सैल था। वे सिर्फ अपनी ही चलाती थी। लेकिन रीमा मुहफट थी पुष्पा जी सेर तो वह सवा सेर थी। कभी कभी पुष्पाजी के मुंह से जेठानी के गुणगान सुनती तो उस का पारा चढ़ जाता। उसे तो वैसे भी जेठानी की आजादी खलने लगी थी

 बार बार सास के मुहँ से जेठानी की तारीफ सुन रीमा के मन मे जेठानी के प्रति बदले की आग भडकने लगी वह कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे साँप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। वह तो एक मौके की तलाश में थी। रीमा चालक और होशियार थी।

कुछ ही महीनों बाद घर में ननद की शादी थी। रीमा तो जैसे इसी मौके के फिराक में थी। सारा परिवार साथ था। उसे शादी के बाद पहली बार जेठानी के साथ वक्त बिताने का मौका मिला। उसनें आसपडोस के लोगों से सुन रखा था कि पुष्पा जी के संबंध सपना से कुछ अच्छे नहीं थे। वे तो कभी कभार गुस्से मे सपना पर हाथ भी उठा देती वो तो सपना थी जो चुपचाप सब सहन किया और अब जा के उसे छुटकारा मिला।

लेकिन रीमा का इस सबसे कुछ लेना देना नही था उसे तो सिर्फ अपना स्वार्थसिद्ध करना था और उसके लिए वह सपना को जरिया बनाना चाहती थी। उसनें सपना के कान भरने शुरू कर दिये वह पुष्पा जी के खिलाफ सपना को भडकाने लगी। र्मीच मसाला लगा वह सपना को अपनी आपबीती सुनाती तो सपना के पुराने घाव ताजा होने लगे उसने कभी अपने लिए आवाज नहीं उठाई लेकिन आज रीमा को इस हालात मे देख वह चूप नहीं रहना चाहती थी। पर वह यह नहीं जानती थी कि यह सब रीमा की एक चाल है जिसमें वह फंसती जा रही हैं। जिसे वह बेचारी समझ रही हैं वह तो खुद उसे अपना शिकार बनाये जा रही थीशादी की भागदौड़ के बीच एक दिन पुष्पा जी और रीमा के बीच कुछ कहासुनी हुई। सपना ये सब मौन रहकर देख नहीं पाई वैसे तो सपना ने कभी भी अपने बचाव मे पलटकर जवाब नहीं दिया लेकिन आज उसके भीतर की ज्वाला लावा बनकर फूट पडी। उसने रीमा का पक्ष लेते हुए पुष्पा जी को बहुत भला बुरा सुनाया। सगे संबंधि सब तमाशा देख रहे थे और रीमा चूपचाप इन सबका मजा ले रही थी। जैसे उसका कोई दोष ही न हो। रीमा की बातों मे आकर सपना खुद एक तमाशा बन गई। सगे संबंधी सपना के बारे मे बाते बनाने लगे। आज वह सबकी नज़रों में गिर चुकी थी। आज तक जो लोग उसे अच्छा समझते थे वे भी उसके

खिलाफ हो गये। जब तक उसे सारी बात समझ में आई तब तक बहुत देर हो चुकी थीं।

तो दोस्तों सपना ने अपने लिए खुद ही मुसिबत को आमंत्रित किया वह अपनी देवरानी को अच्छे से जानती थी फिर भी उसकी बातों में आकर कर दिया ना उसने आ बैल मुझे मार वाला काम।


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