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सच्चाई पर बुराई की जीत

सच्चाई पर बुराई की जीत

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गोलू सरकारी स्कूल में पढ़ता था, उसको अपने मास्टर जी बहुत अच्छे लगते थे । वो क्लास के सब बच्चों को कभी कभी कहानी सुनाते । गोलू को उनसे काहनिया सुनना बड़ा अच्छा लगता था, उसको सच्चाई पर बुराई की जीत वाली कहानी सबसे अच्छी लगी थी। स्कूल के बाद वो अपने पिता के चाय की दुकान पर जाता था, वहीं खेलता भी रहता और उनका हाथ भी बाटता था ।

एक दिन शाम को बाजर में बहुत भीड़ थी । मंदिर की तरफ से एक ठेले वाला धीमी गति से आ रहा था । तभी एक बड़ी सी SUV कार गलत दिशा से तेजी से आई । जैसे ही वो ठेले के पास से गुजरी ठेले वाला सकपका गया ओर ठेले से कार को खरोच लग गई । कार आगे जा कर रुकी ओर उसमे से एक सफ़ेद कुर्ता वाला आदमी निकला।

उस आदमी ने ठेले वाले कि गर्दन पकड़ ली ओर उसके साथ गाली गलोच करने लगा । ये सब देखकर काफी भीड़ जमा हो गईं। ठेले वाला कह रहा था की उसका कोई कसूर नही ओर कार वाला उसको 1000 rs देने कि बात कर रहा था । ठेले वाला बाबू जी किसी से भी पूछ लो मेरी कोई गलती नही । पर भीड़ से कोई कुछ ना बोल रहा था । ये सब गोलू पीछे से देख रहा था , उसने सोचा कि वो सबको सच बतेयगा की गलती कार वाले कि है ।

जैसे ही वो भीड़ में अपनी बात बोलने के लिये आगे बढ़ा किसी ने उसका हाथ थामा ओर गाल पर एक तमाचा दिया, देखा तो वो उसके बापू थे। उसको दुकान की तरफ खिचते हुए बोले, जा ग्लास धो कर ला। गोलू रोते हुग्लास ए साफ करने लगा ।


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