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Anita Sharma

Tragedy Inspirational

4  

Anita Sharma

Tragedy Inspirational

सच्चा प्यार

सच्चा प्यार

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रचना अपना सारा काम निपटा कर थोड़ी कमर सीधी करने के लिये लेट गई। लेटे - लेटे ही वो अपना फोन देखने लगी। उसने नया - नया फेशबुक डाउनलोड किया था। तो सबसे पहले वो वही चैक करती थी।


फेशबुक की नोटिफिकेशन चैक करते हुये अचानक वो अन्दर तक हिल गई। जिसकी वजह से एक वारगी तो उसका फोन गिरते - गिरते बचा।


फिर संभलते हुये उसने गौर से देखा हां ये वही था नील। जिसे उसने अपनी फेशबुक की आई डी बनाते ही सबसे पहले सर्च किया था। पर तब तो वो नहीं मिला पर आज नील की फ्रेंडरिक्वेस्ट आई थी।


रचना ने उसे फ्रेंड बनाने से पहले उसकी फोटो को जूम करके देखा। वही रंग, वही दिल को लूट लेने वाली मुस्कान, बस पहले जो माथे पर अजय देवगन जैसे उसके बाल सजे रहते थे। उनकी जगह अब बड़ा सा साफ माथा चमक रहा था।बढ़ी उम्र का असर उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था।


उसकी फोटो देखते हुये रचना का दिल किसी ट्रेन के इंजन की तरह धड़क रहा था। उसे यूँ लग रहा था जैसे वो पहले की तरह ही उसे प्यार से देख रहा है।देखने का ख्याल आते ही उसे याद आया कि उसकी प्रोफाइल की फोटो कैसी लगी है। उसने जाकर तुरंत अपना सबसे अच्छा फोटो लगाया। और उसकी रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर लिया।


वो भी जैसे इसी इंतजार में बैठा था। तुरंत उसका मैसेंजर पर मैसेज आया.....


"हैलो रचना कैसी हो"?


" ठीक हूँ !! आप कैसे हो?"


"मैं भी ठीक हूँ!! सुनो न ( अपना नम्बर देते हुये) ये मेरा नम्बर है। तुम मुझे व्हाट्सएप पर जोड़ो न बहुत दिनों से तुम्हे ऑन लाइन ढूढ़ रहा हूँ। आज तुम्हारा फोटो दिखा तो तुरंत तुम्हे रिक्वेस्ट भेज दी।"


नील ने कई सारे हाथ जोड़ने वाले इमोजी के साथ अपनी बात रखी।रचना तो तुरंत उसे जोड़ लेती पर फिर उसे लगा कि एकबार वो अपने पति से पूंछ ले फिर उसे जोड़ेगी।


तो उसने " देखती हूँ " का मैसेज करके फोन बंद कर दिया। पर अब उसका मन कहीं नहीं लग रहा था। वो तो उस सपनीली दुनिया में विचरने लगी थी जब वो कॉलेज में पढ़ती थी। और नील भी वही पढ़ता था।


दोनों के ही सब्जेक्ट सेम होने से क्लास में आते जाते अक्सर दोनों की नजरे आपस में टकरा जाती। धीरे- धीरे बात होनी शुरू हुई और दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। दोस्ती कब प्यार में बदल गई रचना को पता भी न चला। कौन पहले प्यार का इजहार करे इसी में दिन व्यतीत हो रहे थे।


देखते ही देखते कॉलेज का आखिरी साल भी आ गया। और इसी साल में रचना के पापा ने उसकी शादी भी पक्की कर दी थी। जिसे सुनकर नील बहुत दुखी और उखड़ा - उखड़ा रहने लगा था। परेशान तो रचना भी थी। पर वो किस आधार पर अपने पापा को बताती। नील ने तो उससे कभी कुछ कहा ही नहीं था।


उस दिन कॉलेज का आखिरी लेक्चर था। सर के आने में देर थी तो वो अपना बैग क्लास में ही छोड़ थोड़ी देर के लिये बाहर निकल गई। लौट कर आई तो बैग कुछ अस्त व्यस्त सा था। पर उसने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। क्लास खत्म हुई, तो उसने नील को आस पास देखा वो आज उससे अपने दिल की बात कहना चाहती थी।क्योंकि वो नहीं चाहती थी की जब भी वो आगे जाकरअपनी पिछली जिन्दगी के बारे में सोचे तो कोई "काश" उसे बेचैन कर दे । पर वो उसे कहीं नहीं दिखा। आँखों में आंसू और दिल का दर्द लेकर वो घर वापिस आ गई।


अनमने मन से उसने पढ़ने के लिये कॉपी निकाली तो उसका एक पेज गायब था। पर उस पेज पर इतना दबाव बनाकर लिखा गया था कि उस लिखावट के कुछ अंश दूसरे पेज पर भी उभर आये थे। रचना ने जल्दी से उसपर पेंसिल घुमाई। जिससे उसका और नील का नाम तो उभर आया पर उसमें लिखा क्या था ये वो चाहकर भी समझ न सकी।


उसके बाद नील उसकी जिन्दगी का एक ऐसा हिस्सा बन गया जिसे वो कभी भूल नहीं पाई। शादी के बाद भी वो अपने पति में नील की ही छवि को ढूढ़ती पर उसके पति तो एक ऐसे शख्स थे जिन्हे मोहब्त से कुछ लेना देना नहीं था।


वो रचना से खूब प्यार करते। रचना की हर ख्वाहिश को पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होती। पर रचना तो उनकी हर बात को नील से जोड़कर देखती और नील के प्यार के सामने पति का प्यारउसे कम ही लगता।जब कभी कॉलेज की बात होती तो रचना खुश होकर नील की बातें बताती।उसने अपने पति को ये तो बता दिया था कि नील उसे पसन्द करता था। पर अपनी पसन्द कभी नहीं बताई थी। बस यही कहा था कि वो उसे अच्छा दोस्त ही समझती थी।


और आज उसने पुराने दोस्त से बात करने के नाम पर अपने पति से इजाजत भी ले ली। रचना के पति को अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास था तो ये बोलकर बात करने की इजाजत देदी कि.......


"तुम्हे अपने दोस्तो से बात करने के लिये मेरी इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। तुम समझदार हो अपना अच्छा बुरा अच्छे से समझ सकती हो। तुम्हे जो सही लगे तुम वही करो। "


एक बार बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो पुराने शिकवा शिकायतों से लेकर प्यार के इजहार तक हर प्रकार की बातें उनमें हुई।


नील से बातें करके रचना के प्यार का भ्रम काँच के टुकड़ो की तरह टूट गया।क्योंकि नील तो औरतों की इज्जत ही नहीं करता था। बात बात में औरतो की हंसी उड़ाना उसकी आदत में शामिल था।रचना नील की बातें सुनकर अपने पति के बारे में सोचती.....


कितने अच्छे है वो। उसकी कितनी इज्जत करते है। भले ही वो नील की तरह उसके आगे पीछे नहीं घूमते। पर उसकी कही हर बातको बिना किसी सवाल जवाब के पूरा कर देते है। आजतक कभी भी उन्होंने रचना पर शक नहीं किया।


ये सब सोचते ही रचना का मन आत्म ग्लानि से भर गया। उसकी आँखों से नील के प्यार की पट्टी उतर चुकी थी। तो अपने फोन से उसका नम्बर डिलीड करने साथ ही अपने दिल का वो कोना भी साफ कर दिया जिसकी वजह से वो कभी भी अपने पति को पूरी तरह से नहीं अपना पाई थी।


मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि छोटी उम्र में हुये आकर्षण को हम अक्सर प्यार समझ लेते है। और पूरी जिन्दगी उसके मोहपाश में बंधे रहते है। पर अगर कभी उसी प्यार से बात करने का मौका मिले तो पता चलता है कि जिसे हम अभी तक नहीं भूले वो तो कब का हमें भुलाये बैठा है। 


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