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Amita Kuchya

Action Classics Inspirational

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Amita Kuchya

Action Classics Inspirational

साहस और निडरता की जरूरत

साहस और निडरता की जरूरत

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जिंदगी के रण में खुद ही कृष्ण बनना पड़ता है, खुद ही अर्जुन अर्थात खुद ही आत्म विश्वास से जिंदगी में आगे बढ़ना पड़ता है। सुरभि बहुत ही सुलझी हुई लड़की थी। उसे लगता था कि कोई भी बात कहना हो तो बिना घुमाएं फिराएं सीधे-सीधे बात करनी चाहिए। उसका मानना था कि जब हम गलत नहीं तो क्यों डरें। उसे अंजाम की कभी भी फिक्र नहीं होती थी।

ऐसा ही उसके साथ हुआ जब कालेज में थी। उसके यहां सीनियर रैगिंग करने का प्लान बना चुके थे। अब उसे पता चला ,उसकी भी रैंकिंग होने वाली है ,वह बिना झिझके कालेज गयी। और जब सीनियर ने उसे रोका ।तब वह बिना डर के उसने भी कहा आप बड़ों से हम तो कुछ सीखेंगे ही ••••

ठीक आप सब हम सब नये चेहरों को जानना चाहते हैं। कल आपके ही छोटे भाई बहन के साथ ऐसा ही कुछ करें तो क्या अच्छा लगेगा?आप लोग सोच लीजिए।

इसी जज्बे के साथ वह अपना परिचय देते हुए आगे बढ़ी ,और किसी की बेइज्जती करने की हिम्मत नहीं हुई। और उसने साथ पढ़ने वाली लड़कियों से बात करते हुए कहा- " हमें किसी से भी डरने की जरूरत नहीं है। अगर परिस्थिति का सामना करने की हिम्मत हो तो हम सारे जहां से टकराने की हिम्मत रख सकते हैं ।"तभी सुरभि ने पूरी लड़कियों को एक जुट होने की बात कही।

उसनेे कहा कि हम सब रैगिंग को रोक सकते हैं यदि आप सब मेरा साथ दे। हम सब मिलकर एक पत्र प्रिंसिपल को लिखे। उसमें रैगिंग न हो। इसमें सबकी सहमति होना चाहिए सबको उस पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे।

फिर सभी ने एक आवेदन में सहमति के लिए हस्ताक्षर किए कि रैगिंग किसी भी जुनियर स्टूडेंट्स के साथ नहीं होना चाहिए। क्योंकि नये स्टूडेंट्स को परेशानी होती है।

इस तरह सुरभि ने प्रिंसिपल के पास लेटर सम्मिट किया। फिर प्रिंसिपल ने नियम बना दिया कोई भी छात्रों के साथ रैंगिग नहीं होनी चाहिए। अगर किसी के द्वारा रैंकिंग करते देखी गई तो फाइन लिया जायेगा।इस तरह उस कालेज में रैंगिग होना बंद हुआ। आज उसे लगा कि यदि वह यह कदम नहीं उठाती तो सीधी-सादी लड़कियों को कितनी मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ता ?

दोस्तों-आज हम जब सही है तो डरने और सहने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आज के समय में खुद ही अर्जुन और खुद ही कृष्ण बनना पड़ता है।सच और अच्छाई की हमेशा ही जीत होती हैं।


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