STORYMIRROR

Kalpesh Patel

Abstract Drama Classics

4.5  

Kalpesh Patel

Abstract Drama Classics

रोशनी

रोशनी

2 mins
19

रोशनी~घर का रास्ता.

शाम की रोशनी आज पिघलकर हवा में घुल रही थी।
सुमन उस कच्ची पगडंडी पर चल रही थी,
जहाँ हर कण में कोई पुरानी याद साँस ले रही थी—
मिट्टी की महक, पेड़ों की सरसराहट,
और दिल में एक नर्म‑सा कंपन…
माँ के लिए लाया हुआ नया चश्मा।उसके हाथ में छोटा‑सा डिब्बा था,
लेकिन उस डिब्बे में बंद था
माँ की दुनिया का फिर से साफ हो जाना।

यादों की पवनजैसे‑जैसे कदम आगे बढ़ते,
यादें पीछे से दौड़कर उसे घेर लेतीं—
माँ की उँगलियों का स्पर्श,
बरामदे में बैठकर पढ़ाई करवाना,
और रात को बालों में हाथ फेरते हुए कहना,
“तू मेरी आँखों का उजाला है, बिटिया।”आज वही उजाला
माँ की आँखों में धुँधला पड़ गया था।
सुमन के दिल में एक नर्म‑सा दर्द उठता—

कितनी बार माँ ने उसे दुनिया दिखाई थी,
आज उसकी बारी थी
माँ को दुनिया वापस देने की।

घर का दरवाज़ा — जहाँ समय थम जाता है.
सुमन दरवाज़े तक पहुँची।
दरवाज़ा वही पुराना लकड़ी का,
थोड़ा झुका हुआ,
लेकिन उसमें एक अजीब‑सी गर्माहट थी—
जैसे दरवाज़ा भी उसे पहचानता हो।अंदर से माँ की धीमी, काँपती आवाज़ आई—
“सुमन… तू आ गई?”सुमन अंदर गई।
माँ ने उसे छूकर पहचान लिया।
आँखों में धुँधलापन था,
लेकिन प्यार…
प्यार बिल्कुल साफ था।सुमन ने चश्मा माँ के हाथ में दिया।
माँ के हाथ हल्के‑से काँपे—
जैसे कोई पवित्र चीज़ को छू रही हों।
उन्होंने चश्मा पहना।
एक पल…
बस एक पल—
और समय ठहर गया।माँ ने सुमन को देखा।
साफ।
पूरी तरह साफ।उनकी आँखों में चमक ओर रोशनी लौट आई।
गालों पर मुस्कान फैल गई।
आवाज़ काँप गई—“अब तू साफ दिखे है, बिटिया…
कितने दिनों बाद…
मैं तुझे ऐसे देख पा रही हूँ।”सुमन की आँखें भर आईं।
माँ ने उसके चेहरे को दोनों हाथों से थाम लिया—
जैसे दुनिया को पकड़ लिया हो।

घर का रास्ता — माँ की आँखों में लौटती रोशनीउस रात माँ बरामदे में बैठी थीं।
चश्मा बार‑बार ठीक करतीं,
और हर बार सुमन को देखकर मुस्कुरातीं—
वही मुस्कान
जो सुमन ने बचपन में हजार बार देखी थी,
लेकिन आज पहली बार
इतनी गहरी लगी।सुमन ने महसूस किया—
घर का रास्ता सिर्फ मिट्टी की पगडंडी नहीं होता,
वह माँ की आँखों में लौटती रोशनी होता है।
वह वह पल होता है
जब एक छोटा‑सा चश्मा
किसी की पूरी दुनिया साफ कर देता है।और उस रात
सुमन ने समझा—
कभी‑कभी हम घर नहीं लौटते,
घर हमारी ओर लौटता है…
माँ की मुस्कान बनकर..



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Abstract